संकेत, जो चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे हैं, फ़ोन ने आपको ग़ुलाम बना लिया है …
August 21st, 2020 | Post by :- | 278 Views

आज के ज़माने में हम फ़ोन के बिना किसी के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं कर सकते. फ़ोन हमारे अपनों से भी ज़्यादा अपना हो गया है. दूसरे शब्दों में कहें तो वह हमारा सच्चा साथी बन चुका है. रात को सोने से पहले हम उसको गुड नाइट बोलकर सोते हैं और सुबह उठते ही सबसे पहले उसी को हाथ लगाते हैं. आप भले ही कितना भी इनकार करें, जब आपका फ़ोन कुछ पलों के लिए आपसे दूर हो जाता है, तब आप पूरा आसमान सिर पर उठा लेते हैं. यह अलग बात है काफ़ी झल्लाने के बाद आपको पता चलता है कि आप ख़ुद ही उसपर बैठ गए थे. अगर आपके साथ बिल्कुल ऐसी घटनाएं या इससे भी अधिक भयंकर हादसे फ़ोन के चलते होते हैं तो आप फ़ोन के ग़ुलामों के क्लब में शामिल हो चुके हैं. अगर आप इसके बावजूद ख़ुद को फ़ोन का मालिक समझते हैं तो आगे पढ़ लीजिए, ग़लतफ़हमी दूर होने में मदद मिलेगी.

फ़ोन को चार्ज होने के लिए छोड़ने की बात सोचकर ही आपका दिल बैठ जाता है. अपने दिल को मज़बूत बनाए रखने के लिए आप चार्ज हो रहे फ़ोन के बगल में बैठकर उसे निहारते हैं. मानो आपकी तीमारदारी से फ़ोन जल्दी ठीक हो जाएगा (यहां चार्ज हो जाएगा पढ़ें). फ़ोन को किसी भी तरह की तक़लीफ़ न हो इसलिए आपने घर और ऑफ़िस के हर कोने में चार्जिंग स्टेशन बनवा रखा है. वाक़ई लाजवाब दरियादिली, आप तो देश के प्रधानमंत्री बनने की योग्यता रखते हैं.

आप घर के पास के ग्रॉसरी स्टोर जाने से पहले अपना ऑनलाइन स्टेटस अपडेट करके जाते हैं. वहां पहुंचते ही दोबारा अपडेट. आख़िरकार आपके दोस्तों और अपनों को पता ही होना चाहिए कि आप कहां हैं. आप अपने अंदर एक जीपीएस चिप ही क्यों नहीं फ़िट करवा लेते?

आप कहीं भी जाएं, उस जगह की अपनी याद को अमर बनाने के लिए दो-तीन सेल्फ़ी क्लिक कर लेते हैं. हम शर्तिया कह सकते हैं, अगर आपको मौक़ा मिले तो मरने से पहले यमराज के साथ भी एक सेल्फ़ी ले लेंगे. अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से कह देना, आपके जाने के बाद आपका फ़ोन चेक कर लें, ताकि उन्हें दुनिया की सबसे दुर्लभ तस्वीर देखने मिल सके.

आप बाथरूम में भी अपने फ़ोन के बिना एंटर नहीं होते. हमारे यहां कहते हैं ना,‘ख़ाली दिमाग़ शैतान का घर’. आप अपने दिमाग़ को बिल्कुल भी ख़ाली नहीं रखना चाहते. भला कौन चाहेगा शैतान उसके शरीर के सबसे ऊपरी हिस्से में अपना आशियाना बनाए.

आप 24×7 ऑनलाइन रहते हैं, पर जब आपका कोई दोस्त आपसे पहले किसी लेटेस्ट न्यूज़ या अच्छी पिक्चर अपलोड करता है तो आप यह सोच-सोचकर दुखी हो जाते हैं कि
आप कैसे चूक गए. आप रो-रोकर अपना बुरा हाल कर लेते हैं.

जब आप बोर हो जाते हैं, तब अपने फ़ोन से बात करने लग जाते हैं. फ़ोन से बतियाकर आपको आत्मिक ख़ुशी भी मिलती है. आप यह सोचकर बहुत ख़ुश होते हैं कि दुनिया में
भले ही आपको कोई न समझे, गूगल असिस्टेंट और सिरी आपकी हर भावना को समझते हैं. मानो, वही आपके सच्चे हमदम हों.