जरूरत से ज्यादा तारीफ करने और “अच्छा” बोलने से भी बिगड़ सकते हैं बच्चे, माता-पिता रखें इन 5 बातों का ध्यान
September 22nd, 2020 | Post by :- | 193 Views

तारीफ एक पॉजिटिव रिएक्शन है, जो आप किसी के कुछ अच्छा करने पर ही देते हैं। कई बार बच्चों का मन रखने के लिए, उनमें कॉन्फिडेंस जगाने के लिए और उनके उत्साहवर्धन के लिए हम उनकी तारीफ करते हैं। ज्यादातर बच्चों पर तारीफ का असर भी पड़ता है और इससे उन्हें फायदा भी मिलता है। लेकिन कई बार कुछ मामलों में बच्चों की ज्यादा तरीफ करना गलत भी हो सकता है। कई बार ज्यादा तारीफ कर देने से बच्चे ओवर कॉन्फिडेंट हो जाते हैं या फिर इस बात के लिए आश्वस्त हो जाते हैं कि वो कुछ गड़बड़ करेंगे, तो भी आपके मन में उनके प्रति विश्वास के कारण बच जाएंगे। इसलिए बच्चों की तरीफ करते समय मां-बाप को बहुत सावधान और सतर्क रहना चाहिए। ऐसा भी न हो कि आप बच्चे की बिल्कुल तारीफ न करें और ऐसा भी न हो कि आप उसकी जरूरत से ज्यादा तारीफ कर दें। इसलिए हम आपको बता रहे हैं 5 खास पैरेंटिंग टिप्स।

काम की तरीफ करें, करने वाले की नहीं

बच्चों के सामने तारीफ करते समय आपको ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे का कॉन्फिडेंस भी बढ़े और वो ओवर-कॉन्फिडेंट भी न हो। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है कि आप हमेशा काम की तरीफ करें, न कि करने वाले की। जैसे- मान लीजिए आपके बच्चे ने घर की साफ-सफाई की, तो आपको उसे बार-बार अच्छा और महान बताकर नहीं, बल्कि ये बोलकर तारीफ करनी चाहिए कि उसने अच्छी तरह सफाई की है और यही सफाई का सही तरीका है। कुल मिलाकर काम के प्रॉसेस की तारीफ करने, न कि करने वाले की।

सबके सामने अच्छा न कहें

इसी तरह कुछ मां-बाप दोस्तों और रिश्तेदारों के सामने ही बच्चों को “बहुत अच्छा”, “बहुत शांत”, “बहुत प्यारा”, “बहुत ईमानदार”, “बहुत पढ़ाकू” आदि बोलकर तारीफ करते हैं। ये ऐसी बातें हैं, जो समय और उम्र के साथ बदलती रहती हैं, इसलिए इन बातों की तरीफ करने का कोई अर्थ नहीं है। हां, अगर बच्चा सामने नहीं है, तब आप ऐसा बोल सकते हैं। दरअसल होता यह है कि जब आप बच्चे के सामने ही उसे किसी चीज में बहुत परफेक्ट, बहुत अच्छा बताते हैं, खासकर क्वालिटीज के मामले में, तो उसमें ये ओवर-कॉन्फिडेंस आ जाता है कि अगर वो थोड़ी गड़बड़ भी कर देगा तो कोई नहीं मानेगा। इसलिए ऐसी तारीफ करने से भी बचें।

झूठी तारीफ कभी न करें

कुछ मां-बाप अपने बच्चों को ज्यादा अच्छा दिखाने के लिए दूसरों के सामने उनकी झूठी तारीफ करने लगते हैं। या फिर बच्चे का मनोबल बढ़ाने के लिए जरूरत से ज्यादा और बढ़ा-चढ़ाकर तारीफ करने लगते हैं। ये आदत भी बच्चों के स्किल डेवलपमेंट के लिए नुकसानदायक है। इससे बच्चों के अंदर सीखने, समझने की क्षमता कम हो जाती है।

तुलनात्मक तारीफ न करें

कभी भी बच्चों की तुलनात्मक तारीफ नहीं करनी चाहिए। तुलनात्मक तारीफ का मतलब है कि बच्चे के सामने ही किसी दूसरे बच्चे से उसकी तुलना करते हुए तारीफ करना। इस तरह की तारीफ का असर बच्चे के मस्तिष्क पर नकारात्मक पड़ता है। इसलिए अपने बच्चे की तुलना न तो उसके सामने, न ही उसके पीठ पीछे, किसी अन्य बच्चे से करें और न ही उसे स्वयं ऐसा करने दें।

सिर्फ उसी बात की तारीफ करें, जिस पर बच्चे का कंट्रोल हो

कुछ चीजें बच्चे करके सीखते हैं और कुछ चीजें अपने आप सीख जाते हैं। इसलिए आपको बच्चों की उन्हीं बातों की तारीफ करनी चाहिए, जिसमें उनसे स्वयं प्रयास किया हो यानी स्वयं एफर्ट डाला हो। ऐसी चीजों की तारीफ बिल्कुल न करें, जिसे बच्चे ने दूसरों की सहायता से किया है या जो अपने आप हो गया है।