इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के बारे में प्रचलित मिथक और तथ्य #loveromance
September 29th, 2020 | Post by :- | 86 Views

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन या स्तंभनदोष पुरुषों में होने वाली यौन समस्याओं में से एक आम समस्या है। सम्भोग के लिए लिंग में आवश्यक तनाव न लाना पाना इरेक्टाइल डिस्फंक्शन है। ज्यादातर पुरुष अपने जीवन में कभी न कभी इस समस्या से परेशान जरुर होते हैं। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का उपचार मौजूद है और बहुत ही आसान भी है। कभी-कभी ही इसके इलाज के लिए ऑपरेशन की जरुरत पड़ती है। सामान्य तौर पर इस रोग का निदान दिनचर्या और जीवनशैली में बदलाव लाकर भी दूर किया जा सकता है। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को लेकर लोगों में कई तरह के मिथक भी मौजूद हैं जो कई बार उनके लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं। आइए जानते हैं इससे जुड़े कुछ प्रचलित मिथकों के बारे में।

1. मिथक:
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन उम्र बढ़ने के साथ होने वाली स्वाभाविक समस्या है।
सत्यता:
ये सच है की इरेक्टाइल डिस्फंक्शन होने की संभावना उम्र बढ़ने के साथ बढती है। मगर ये उम्र बढ़ने के साथ-साथ होने वाली स्वाभाविक प्रक्रिया नहीं है। जिस तरह उम्र बढ़ने के साथ आदमी के बाल सफ़ेद होते हैं. झुर्रिया बढती हैं उस तरह ये जरुरी नहीं है की उम्र बढ़ने के साथ इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या भी आये।

2.मिथक:
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का प्रभाव सिर्फ पुरुषों पर ही पड़ता है।
सत्यता:
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से पुरुष तो प्रभावित होते ही हैं साथ ही साथ पुरुष की महिला साथी भी इस से प्रभावित होती है। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन पुरुष के आत्मविश्वास को कमजोर कर देता है जिस वजह से उनमे कई तरह के मानसिक विकार उत्पन्न होते हैं। दूसरी तरफ पुरुष की महिला साथी भी पुरुष के शरीर और मन में आये इस बदलाव से प्रभावित होती है।

3. मिथक:
चुस्त अंतर्वस्त्र(अंडरवेअर) पहनने से होता है इरेक्टाइल डिस्फंक्शन।
सत्यता:
चुस्त अंतवस्त्र पहनने का सम्बन्ध बांझपन से है। चुस्त अंतर्वस्त्र पहनने से अंडकोष का तापमान बढ़ता है और अंडकोष में मौजूद शुक्राणु नष्ट होते हैं। मगर अभी तक किसी शोध या अध्ययन में ये बात स्पष्ट नहीं हुई है की चुस्त अंतर्वस्त्र पहनने से इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या उत्पन्न होती है।

4. मिथक:

रिश्तों में होने वाली दिक्कतों की वजह से होता है इरेक्टाइल डिस्फंक्शन।
सत्यता:
रिश्तों में आई दिक्कतें और परेशानी कई बार पुरुषों को तनाव में डालती है और उनमे सम्भोग करने की इच्छा को नकरात्मक रूप से प्रभावित करती है। मगर ज्यादातर मामलों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या शारीरिक समस्याओं की वजह से होती है मनोवैज्ञानिक वजहों से नहीं। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का सही ढंग से उपचार नहीं होने पर ये रिश्तों में खटास ला सकती है।

5. मिथक:
यौन उत्तेजना बढ़ने वाली दवाओं का सेवन ही इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का एकमात्र उपचार है।
सत्यता:

जीवनशैली और दिनचर्या में बदलाव लाना जैसे शराब और धूम्रपान छोड़ना, वजन घटाना, व्यायाम करना दवा लेने से पहले जरुरी होता है। कई बार इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या इन तरीको से दूर की जाती है। दवाओं का सेवन भी इस समस्या का उपचार है पर ये हर किसी के लिए कारगर साबित नहीं होता।

6. मिथक:
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से ग्रसित लोगों में यौन इच्छा नहीं होती।
सत्यता:
यौन इच्छा का सम्बन्ध हॉर्मोन के स्राव से सम्बंधित है और इसका इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से कोई लेना देना नहीं होता। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से पीड़ित कुछ लोग शर्मिन्दगी से बचने और सम्भोग के दौरान अच्छा प्रदर्शन न कर पाने के डर से अपनी यौन इच्छा को दमित करते हैं। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन प्रत्यक्ष रूप से यौन इच्छा को प्रभावित नहीं करता।

7. मिथक:
लिंग में तनाव लाने में कठिनाई इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का संकेत देती है।
सत्यता:
एक बहुत बड़ा मिथक यह है की पुरुष हमेशा सम्भोग के लिए तैयार होते हैं। जबकि सच्चाई ये होती है की महिलाओं की तरह पुरुष भी कभी-कभी सम्भोग करने के मूड में नहीं होते। थकान, घबराहट, परेशानी या निजी समस्याओं की वजह से कई बार पुरुष के लिंग में तनाव नहीं आता या फिर वो सम्भोग करने के इच्छुक नहीं होते। इसका ये मतलब नहीं होता की वो इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या से जूझ रहे हैं।

8. मिथक:
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन सिर्फ उम्रदराज पुरुषों में होता है।
सत्यता:
यह बात सच है की उम्र बढ़ने के साथ-साथ पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन होने की समस्या बढती है पर ये जरुरी नहीं सभी उम्रदराज पुरुषों को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या हो। युवाओं में भी इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की शिकायत पायी जाती है। अमेरिकन जर्नल ऑफ़ मेडिसिन के एक सर्वेक्षण के अनुसार अमेरिका में 20 से 39 वर्ष की उम्र वाले 15 प्रतिशत पुरुष इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की की समस्या से परेशान होते हैं।

9.मिथक:
आपकी बुरी आदतें आपके लिंग पर प्रभाव नहीं डालती।
सत्यता:
आपकी बुरी आदतें आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तो होती ही हैं आपके लिंग पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। शराब, सिगरेट, तम्बाकू इत्यादि का सेवन आपके यौन स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। धूम्रपान करने से रक्तवाहिकाएं(ब्लड वेसल्स) क्षतिग्रस्त होती है जिस से रक्तसंचार प्रभावित होता है। लिंग में पर्याप्त रक्त न पहुंचने के कारण तनाव होना कठिन हो जाता है।

10. मिथक:
टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढाने से खत्म होती है इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या।
सत्यता:
अगर आपका टेस्टोस्टेरोन स्तर सामान्य है तो किसी टेस्टोस्टेरोन बूस्टर सप्प्लिमेंट्स का इस्तेमाल कर टेस्टोस्टेरोन का स्तर समान्य से ज्यादा बढ़ा लेने से इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या दूर नहीं होगी। ऐसी स्थिति में ये जांचना जरुरी है की आपक शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कितना है। सामान्य तौर पर शरीर में टेस्टेरोन का स्तर 300नैनोग्राम/डेसीलिटर होना चाहिए। जिनमें टेस्टोस्टेरोन का स्तर इस से कम होता है उन्हें इलाज की जरुरत होती है।