सेक्स की इच्छा न होना बिल्कुल सामान्य है! ऐसे लोग भी दुनिया में हैं #loveromance
September 30th, 2020 | Post by :- | 260 Views

हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं, जहां लोग सेक्स के दीवाने हैं, पर हमारे आसपास ऐसे लोग भी हैं, जो सेक्स में बिल्कुल रुचि नहीं लेते. हम बता रहे हैं कि क्यों कुछ लोगों के भीतर सेक्स की इच्छा का न होना बिल्कुल सामान्य है.

हमारी सोच से भी ज़्यादा सामान्य है एसेक्शुऐलिटी
क्या आपने कभी सेक्स संबंधी उदासीनता यानी एसेक्शुऐलिटी के बारे में सुना है. हममें से लगभग सभी अपने जीवन में कभी न कभी सेक्स के प्रति उदासीन भाव महसूस करते हैं, जो कि बिल्कुल सामान्य बात है, पर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने अपने जीवन में कभी-भी सेक्स संबंधी आकर्षण महसूस नहीं किया. बेशक यह अचरज की बात है, क्योंकि सेक्स तो हमारे आसपास हर जगह मौजूद है. इसी की वजह से तो हमारा अस्तित्व है और एक सच्चाई ये भी है कि ये बहुत आनंददायक है. फ्रायड और किन्से के समय से ही यह माना जाता रहा है कि यदि किसी के अंदर सेक्स के प्रति रुझान नहीं है तो वो बड़ा ही दमित या भ्रमित इंसान है. इस हिसाब से तो एसेक्शुऐलिटी असंभव होना चाहिए, पर ये हमारी सोच से कहीं ज़्यादा सामान्य बात है. वर्ष 2004 में जरनल ऑफ़ सेक्स रिसर्च में प्रकाशित एक रिपोर्ट में 18,000 ब्रिटिश नागरिकों पर किए गए सर्वे में एक प्रतिशत लोगों ने स्वीकारा कि वे एसेक्शुअल हैं.

सेक्स नहीं, पर होता है भावनात्मक आकर्षण
जिन लोगों की सेक्स में रुचि नहीं होती, ज़रूरी नहीं है कि वे विपरीत लिंगी व्यक्तियों से भावनात्मक कनेक्शन स्थापित न कर पाएं. एसेक्शुअल लोग भी अपोज़िट सेक्स के लोगों का साथ पसंद करते हैं. उनके साथ अकेले में बैठना, कहीं घूमने जाना, फ़ोन पर घंटों बातें करना या एक-दूसरे का हाथ पकड़े-पकड़े घूमना उनके लिए बहुत सामान्य बात है. कहने का मतलब है कि सेक्स के अलावा वे बाक़ी सभी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं. शारीरिक संबंधों से परे जाकर बनाए जानेवाले भावनात्मक संबंधों पर इन दिनों क्लीनिकल रिसर्च भी हो रही है. इस बात को स्वीकार किया जाने लगा है कि कई लोगों को सेक्स की इच्छा होती ही नहीं है. एसेक्शुअल लोगों की भी वही भावनात्मक ज़रूरतें होती हैं, जैसी किसी भी अन्य व्य‌क्ति की होती हैं. उनके रिश्ते बहुत घनिष्ठ होते हैं, पर उन्हें शारीरिक संबंधों की ज़रूरत महसूस नहीं होती.

एसेक्शुऐलिटी और सेक्शुअल डिस्ऑर्डर दोनों हैं अलग बातें
एसेक्शुऐलिटी को अब तक चिकित्सीय दर्जा नहीं मिला है. बड़े पैमाने पर लोग इसे सेक्शुअल डिस्ऑर्डर से जोड़कर देखते हैं, पर असल में दोनों बिल्कुल दो अलग चीज़ें हैं. सेक्शुअल डिस्ऑर्डर में जब भी मरीज़ सेक्शुअल संबंध बनाता है तो उसे तनाव या पैनिक अटैक होता है. वहीं एसेक्शुऐलिटी ऐसे लोगों के लिए ख़ुद को छुपाने का साधन भी बन सकता है, जो होमोसेक्शुअल होने की वजह से, सेक्स से किसी तरह के डर या फिर बचपन के किसी बुरे अनुभव की वजह से अपनी सेक्शुऐलिटी का दमन करना चाहते हैं. जहां ब्रम्हचर्य एक चुनाव है, वहीं सेक्स संबंधी उदासीनता एक सेक्शुअल स्थिति है.