हम अरेंज्ड मैरिज से दूर क्यों भागते हैं? #news4
October 3rd, 2020 | Post by :- | 192 Views

वे शायद आपके लिए ही बने हैं, लेकिन उन्हें आपके माता-पिता ने एक ऑनलाइन वैवाहिक पोर्टल के ज़रिए ढूंढ़ा है. हमें इस बात पर आश्चर्य हो रहा है कि क्या सिर्फ़ यही एक कारण है कि हम आजकल की युवतियां अरेंज्ड मैरिज के विचार का इतना विरोध करते हैं
उस रविवार लावण्या शरण*, 24, एक कप कॉफ़ी और एक किताब का लुत्फ़ ले रही थीं. तभी उनकी मां का फ़ोन आया, जो उन्हें घर बुला रही थीं, क्योंकि उन लोगों ने वैवाहिक रिश्ते के लिए एक लड़के को घर पर बुलवाया था. लावण्या ने उनकी बात सुनी और फ़ोन रख दिया. एक घंटे बाद वे अपने घर पहुंच गईं-अपना सिर मुड़वाकर. ‘‘मैं अपने माता-पिता से कह रही थी कि मैं अभी शादी के लिए तैयार नहीं हूं, क्योंकि मैं पढ़ना चाहती हूं. लेकिन वे मेरी बात पर ध्यान ही नहीं दे रहे थे. अत: मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था,’’ लावण्या कहती हैं. ‘‘मेरी मां उस शाम रो पड़ीं, लेकिन बाद में उन्हें मेरा नज़रिया समझ में आ गया.’’
इस सिस्टम का विरोध करनेवाली लावण्या ही अकेली नहीं हैं. अर्पिता* शाह को भी अरेंज्ड मैरिज बहुत सारे बोझ के साथ होनेवाला विवाह लगता है. ‘‘मुझे लगता है कि पहले स्वाभाविक रूप से प्यार होना चाहिए. विवाह तो एक लंबी प्रतिबद्धता है, जिसे हम निभाते हैं. मैं किसी ऐसे व्यक्ति के साथ विवाह नहीं करना चाहूंगी, जो मुझे ‘ऑनलाइन’ मिल गया या जिसके बारे में किसी रिश्तेदार ने बता दिया. मैं उस व्यक्ति से शादी करना चाहूंगी, जिसे मैं प्यार करती हूं. ताकि जब मेरे बच्चे मुझसे पूछें तो मैं बता सकूं मैं उनके डैड से कैसे मिली थी,’’ वे कहती हैं.

हठ की वजह
तो वो क्या बात है, जो हमें अरेंज्ड मैरिज का विरोध करने पर मजबूर करती है? बिहेवियरल एक्सपर्ट डॉ हेमंत मित्तल के पास इसकी तर्कसंगत व्याख्या है. अरेंज्ड मैरिज को हमारे समाज में व्यग्रता के संकेत के रूप में देखा जाता है. वे कहते हैं,‘‘कई लोगों को ये अतर्कसंगत लगती है. बायो-डाटा, चेहरा-मोहरा देखकर और मैचमेकर्स की सिफ़ारिश से आए वैवाहिक प्रस्तावों के साथ अनुरूपता न होने का डर बना रहता है.’’
काउंसलर डॉ राजन भोसले का मानना है कि अधिकतर युवाओं के लिए परिवार रूढ़िवादी नैतिक सिस्टम का प्रतीक होता है. ‘‘ज़्यादा से ज़्यादा महिलाएं अरेंज्ड मैरिज से इनकार करती हैं, क्योंकि वे ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जीना चाहती हैं. पर ऐसे प्रकरणों में अक्सर मैंने पुरानी पीढ़ी में एक तरह की कठोरता और नई पीढ़ी में विद्रोह पाया है.’’
काउंसलर्स का यह भी मानना है कि महानगरीय जीवनशैली नए रिश्तों के पनपने में बाधक होती है. ऑफ़िस में काम की अधिकता का मतलब है सामाजिक जीवन का कम होना-और जीवनसाथी ढूंढ़ने के लिए भी कम ही समय मिलता है. और ऐसा तो हो नहीं सकता कि आपको एक रुचिकर और योग्य इंसान किसी बार में मिल जाए! प्रार्थना मोहन*, 32, जिन्होंने अरेंज्ड मैरिज की है, उनका मानना है कि अरेंज्ड मैरिज कई मामलों में बहुत दिलचस्प होती है. ‘‘अरेंज्ड मैरिज की सबसे अच्छी बात ये है कि आपको केवल अनुरूपता के स्तर को जांचना होता है. दूसरी सारी बातें, जैसे-बैकग्राउंड व सामाजिक प्रतिष्ठा जैसी बातों का विश्लेषण करना आपके परिवार की ज़िम्मेदारी होती है. और आपस में निभाना तो हमारी अपनी ही ज़िम्मेदारी होती है, फिर चाहे अरेंज्ड हो या लव मैरिज.’’ हर विवाह की अपनी कहानी होती है. ज़रूरत है तो बस, अपनी कहानी को रचने की.
*आग्रह पर नाम बदले गए हैं