अच्छा पैरेंट बनने के लिए इन बातों पर भरोसा करें या ना करें, पर पढ़ ज़रूर लें #loveromance
October 9th, 2020 | Post by :- | 158 Views

हमारी जनरेशन के साथ समस्या यह है कि हर जगह अच्छा हमें ही बनना है. हमारे पैरेंट्स चाहते हैं कि अच्छे बहू-बेटे बनें. और बच्चे एक्सपेक्ट करते हैं कि हम अच्छे पैरेंट भी बनें. जब आपको अच्छा बनने के लिए कहा जाता है तो शायद सामनेवाला यह मानकर चलता है कि आप ज़ाहिर तौर पर अच्छे नहीं हैं. जब कोई आपको कम अच्छा समझकर ज्ञान दे तो ज़ाहिर है आप खीझ से भर जाएंगे. पर हमसे कहा गया है कि हम आपको अच्छा पैरेंट बनने के गुरु मंत्र दें. तो चलिए कुछ मुफ़्त में मिला और ज्ञान पढ़िए, थोड़ा और खीझिए… मतलब थोड़ा और अच्छा बनिए.

बच्चों को प्यार करिए, पर याद रखें उन्हें बड़ा भी बनना है
बच्चे होते ही इतने प्यारे हैं कि दुनिया के सबसे कठोर दिल इंसान का मन भी पसीज जाए. जब बात ख़ुद अपने बच्चे की हो तो वे तो हमारी कमज़ोरी होते हैं. ऐसे पैरेंट्स की कमी नहीं है, जो अपने बच्चों को प्यार की बारिश में इस क़दर भिगोने पर आमादा रहते हैं कि लाड़-प्यार का लॉन्ग टर्म इफ़ेक्ट नहीं देख पाते.
पश्चिम के किसी फ़िलॉसफ़र ने कहा था बच्चों को प्यार करने से वे नहीं‌ बिगड़ते, उनकी ग़लत बातों को नज़रअंदाज़ करने से वे ग़लत रास्ते पर निकल पड़ते हैं. बच्चे को प्यार से सही राह दिखाएं, पर उनकी ग़लती पर क़ायदे से समझाना भी न भूलें. कई केसेस में ऐसा भी आपने सुना होगा,‘बचपन से ध्यान दिया होता तो ऐसा न होता.’ बच्चे हमेशा बच्चे नहीं रहनेवाले. उन्हें बड़ा भी बनना है. प्यार और समझाइश का बैलेंस इस बात को ध्यान में रखकर करें.

आप अपने बच्चे के हीरो हैं, तो हीरो की तरह बिहेव भी करें
यह बात आपने कितनी बार, कितने तरीक़े से पढ़ी या सुनी होगी कि हमें अपने बच्चों का रोल मॉडल बनना चाहिए. यह बिल्कुल सच है. दुनिया के हर पैरेंट अपने बच्चे के शुरुआती रोल मॉडल या कहें हीरो होते हैं. वे आपकी तरह ही ब‌िहेव करते हैं. अगर आप चाहते हैं कि उनका हीरो उन्हें सही ‌सीख दे तो हीरो को भी सही काम करना होगा. अब हमारे कहने का यह क़तई मतलब नहीं है कि आप सही काम नहीं करते हैं. आप करते हैं, करते रहिए. यक़ीन मानिए आपका बच्चा बड़ा होकर आप जैसा बनेगा.

बच्चों की ज़िंदगी में इतना इन्वॉल्व न रहें, कि उनका होमवर्क आपका बन जाए
हर अभिभावक को अपने बच्चों को समय देना पड़ता है. समय देने के लिए हम कामकाज़ी पैरेंट्स अपने शेड्यूल को अड्जस्ट करते हैं और समय निकालते हैं. यदि आपको ऐसा बार-बार करना पड़ रहा है तो ज़रा ठहर कर ख़ुद से पूछिए क्या हर जगह बच्चे के साथ रहना और उसकी ज़िंदगी में इन्वॉल्व रहना ज़रूरी है? बेशक आप बच्चों को भाग्य के भरोसे नहीं छोड़ सकते, पर कुछ पैरेंट्स बच्चों की परवरिश में इतने खो जाते हैं कि उनका होमवर्क भी अपना ही वर्क समझने लगते हैं. इससे क्या होगा? आपका काम का प्रेशर बढ़ेगा और होमवर्क करके बच्चों को जो चीज़ें सीखनी थीं, वह नहीं हो पाएगा. तो बात साफ़ है, बच्चों को गाइड करें, उनके लिए काम न करें. उन्हें इंडिपेंडेंट बनाएं.

उम्र के साथ बदलेगा बच्चा, बदलना होगा आपको भी
यदि आप चाहते हैं कि आपके और बच्चे के बीच हमेशा एक हेल्दी रिलेशनशिप बरकरार रहे तो उसकी उम्र के साथ आपको ख़ुद को भी बदलना होगा. आप यह मानकर नहीं चल सकते कि बचपन में आपकी जिन बातों या हरक़तों पर वह दिल खोलकर हंसता था, बड़ा होने पर भी उसका रिऐक्शन वही होगा. वह मैच्योर हो रहा है तो आपको भी मैच्योरिटी शो करनी होगी. उसको हंसाने ही नहीं, मनाने और मोटिवेट करने के अपने तरीक़ों को भी आपको समय के साथ बदलना होगा. हां, एक समय के बाद आपको ख़ुद को इसलिए भी तैयार करना होगा कि बच्चे से जुड़ी बातों के फ़ैसले में उसकी बात की अहमियत आपकी समझदारी से कहीं अधिक होगी.

नियमित रहकर ही आप बच्चे को दिखा सकते हैं सही राह
आपका बच्चा सही ट्रैक पर रहे इसके लिए सबसे ज़रूरी बात है उसके लिए सेट किए गए रूल्स की कंसिस्टेंसी यानी उनमें‌ नियमित रहना. यदि आप रोज़ नए-नए रूल्स बनाएंगे तो वह कन्फ़्यूज़ होगा और उसका बिहेवियर भी अनप्रेडिक्टेबल हो जाएगा. तो सबसे पहले आपको अपने बनाए नियमों के पालन में अनुशासित रहना होगा. आपको यह बात समझनी होगी कि कुछ बातों को नॉन-निगोशिएबल छोड़ने में ही अच्छा है. और एक बात, जो भी नियम आप बच्चे के लिए सेट कर रहे हों, वे तार्किक आधार पर हों, अन्यथा जैसे ही बच्चे की तर्कशक्ति विकसित होगी वह अतार्किक और पैरेंट्स द्वारा बनाए गए एकतरफ़ा नियमों को चैलेंज करेगा. उससे आपके और बच्चे के रिश्ते पर नकारात्मक फ़र्क़ पड़ेगा.