बिना शर्त सेक्स के बाद, जब जाग जाएं इमोशन! #loveromance
October 23rd, 2020 | Post by :- | 197 Views

आपने तय किया था कि ये रिश्ता केवल सेक्स तक ही सीमित रहेगा, लेकिन छह महीने बाद आपके मन में प्यार के तराने गूंजने लगे. उन्हें इस एहसास के बारे में कैसे बताएं? और क्या होगा यदि वे ऐसा महसूस नहीं करते? फ़ेमिना ने इन सवालों के जवाब ढूंढ़े.

‘एक बेवकूफ़ाना ग़लती.’
‘‘राजीव* और मैं ऑफ़िस के पहले दिन ही क़रीब आ गए थे. तीन वर्षों तक उन्हें जानने के बाद मुझे लगा कि मैं उनसे प्यार करने लगी हूं. जब मैंने उन्हें बताया तो उन्होंने कहा कि वो भी मेरी तरफ़ आकर्षित हैं. फिर मैं इतनी ज़्यादा खो गई कि मैं जाने क्या-क्या कह गई. मैंने उनसे कहा कि जब तक उन्हें कोई दूसरी पार्टनर नहीं मिल जाती, हम साथ रह सकते हैं. तब मुझे लगा था कि ये सही है. मेरे साथ डेट करते हुए उन्हें भी एहसास हुआ कि मैं उनके लिए ही बनी हूं. मैंने ध्यान ही नहीं दिया कि मैंने ही उन्हें इस बात का पास दे रखा है कि वे जब चाहें, बिना किसी ग्लानि के मेरे जीवन से जा सकते हैं. हम कुछ महीनों तक बहुत ख़ुश थे, लेकिन तब उन्हें एक दूसरी युवती से प्यार हो गया. उन्हें उनकी गर्लफ्रेंड के साथ देखकर मेरा दिल टूट गया. सौभाग्य से उन्हें दूसरी नौकरी मिल गई. अब तीन वर्ष बाद, मैं इस बात से ख़ुश हूं कि मैं उनकी गर्लफ्रेंड थी, लेकिन मेरा इस तरह इतना दर्द पाना उचित नहीं था.’’
निशा मीरचंदानी, 28, आईटी प्रोफ़ेशनल

‘एक दर्दनाक यात्रा के लिए तैयार रहें.’
‘‘इस रिश्ते की शुरुआत में केवल सहूलियत का तालमेल हो सकता है, वचनबद्धता का नहीं. आपने यह सोचा ही नहीं है कि आप भावनात्मक रूप से भी जुड़ सकते हैं. प्यार कोई तार्किक भावना नहीं है और यह सोचना कि चूंकि आपने पहले ही तय कर लिया है अत: आप भावनाओं को नियंत्रित कर लेंगी, बेवकूफ़ी है. मुश्क़िल तब आती है, जब ऐसे रिश्ते का प्यार इकतरफ़ा हो. आप किसी दूसरे को आपसे प्यार करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते. अत: एक दर्दनाक यात्रा के लिए तैयार रहें. जब यह महसूस होने लगे कि सहूलियत के लिए बना यह रिश्ता अब असुविधाजनक और असहनीय हो रहा है तो मानसिक शांति के लिए इस रिश्ते से बाहर निकल आएं. मैंने ऐसे लोगों को देखा है, जो अकेले रहने के बजाए बुरे रिश्ते में रहना पसंद करते हैं, लेकिन इससे तो आपकी पीड़ा ही बढ़ेगी.’’
डॉ रीमा मुखर्जी, साइकियाट्रिस्ट

‘अपनी स्थिति को समझें.’
‘‘अपने दिल को दांव पर लगाकर आप ख़तरनाक व्यापार कर रही हैं, जबकि आप जानती हैं कि आप ये खेल हारनेवाली हैं. भले ही आप तार्किक ढंग से सोचें, लेकिन आपको महसूस ही नहीं हो पाएगा कि आप कब उनसे प्यार करने लगी हैं. ये आपके अवचेतन का निर्णय भी हो सकता है. अत: पहले ये जांचे कि ये रिश्ता कितना आगे बढ़ चुका है. ऐसा हर रिश्ता शारीरिक नहीं होता. पता करें कि कौन-सी बात आपको उनसे जोड़ती है. अपनी आवश्यकताओं को पहचानें. ख़ुद से पूछें कि जीवनसाथी में आप कौन-से गुण चाहती हैं. क्या वे आपकी उम्मीद पर खरे उतरते हैं? यदि नहीं तो उनसे बात करें. यदि रिश्ता नहीं चल पा रहा तो यह सोचकर इसे घसीटने की ज़रूरत नहीं है कि कुछ समय बाद सब कुछ अपने आप ठीक हो जाएगा. इससे आप निराशा की गर्त में जा सकती हैं. अपने दिल की सुनें और यदि ये काम नहीं कर रहा है तो आगे बढ़ जाएं.’’
डॉ वाय ए माचेसवाला, साइकियाट्रिस्ट