‘औरत ही औरत की सबसे बड़ी दुश्मन होती है’ आइए इस सोच को बदल डालें
August 18th, 2020 | Post by :- | 201 Views

हम बता रहे हैं कि आप अपनी सबसे अच्छी मित्र, सबसे अच्छी कलीग के अलावा भी अन्य महिला मित्रों का साथ देकर किस तरह बहनापा निभा सकती हैं.

उसकी सर्वश्रेष्ठ रुचि पर ध्यान दें: आप अपनी दोस्त के नए रिश्ते और उसकी ख़ुशियों में साथ निभाना चाहती हैं. लेकिन जब वे किसी असफल व्यक्ति के साथ होतीं तो आप क्या करतीं? ऐसी स्थिति से निपटने का सबसे सही तरीक़ा है उसके साथ ईमानदार रहना. आपका उसपर अधिकार है. ‘‘मेरी दोस्त एक ऐसे व्यक्ति को डेट कर रही थी, जो हर दूसरे दिन शराब के नशे में धुत होकर तमाशा खड़ा करता था,’’ बताती हैं प्रीति शाह*. ‘‘शुरू में तो यह का़फी मज़ेदार लगता था, लेकिन बाद में मेरी दोस्त के अलावा हम सब इससे उकता गए. उसने सोचा कि उसके साथ ज़िंदगी हर दिन एक पार्टी की तरह होगी.’’ प्रीति की दोस्त तो उससे शादी करने के लिए भी राज़ी हो गई थी. ‘‘मैं उसे ऐसे व्यक्ति के साथ नहीं रहने दे सकती थी, जो ज़िंदगी को बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लेता था. अत: उसके साथ अपने रिश्ते के टूटने की परवाह किए बग़ैर मैंने उसे अपने दिल की बात बता दी और उससे कहा कि वह इससे बेहतर की हक़दार है. उसने मुझसे बात करना बंद कर दिया. मुझे नहीं मालूम कि वे अब भी साथ हैं या नहीं. लेकिन मैं उसे उस व्यक्ति के साथ रहने नहीं दे सकती थी.’’

महिलाओं का साथ दें: कुछ पुरुष महिलाओं के शारीरिक विवरणों पर अभद्र टिप्पणी करते हैं. यह जानते हुए भी कि हम सुन रहे हैं, वे महिलाओं के स्तनों पर टिप्पणियां और ऑफ़िस के प्रेम प्रसंगों के बारे में अफ़वाहें उड़ाते हैं. समय आ गया है महिलाओं के बारे में शर्मनाक बातें करनेवालों का मुंह बंद कराने का. ‘‘जब वे किसी महिला का मज़ाक उड़ाते हैं तो उनके साथ हंसना क्या आपको उनके जैसा नहीं बनाता?,’’ पूछती हैं सुतापा बसु. ‘‘यह आपको उतना ही महिला द्वेषी बनाता है, जितने कि वे हैं. वे महिलाओं का सम्मान करना कैसे सीखेंगे, यदि कोई महिला ही उनके मज़ाक में शरीक हो?’’

दोषारोपण का खेल न खेलें: इसे जल्द से जल्द रोकने की ज़रूरत है. जबरन सेक्शुअल संबंध का शिकार हुई महिलाओं की उपेक्षा करना बिल्कुल ग़लत है. ‘‘सेक्शुअल हमला शक्ति के दम पर किया गया अपराध है, न कि कोई मनोविकार. जब महिलाओं पर हमला होता है तो केवल हमलावर ही दोषी होता है,’’ कहती हैं सुतापा. ‘‘महिला ने क्या पहन रखा था, वह नशे में थी या नहीं, क्या वह मस्ती-मज़ाक कर रही थी-इससे हमलावर का दोष कम नहीं होता. महिला कभी ग़लत नहीं होती. हमें यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए, फिर चाहे आपको वह महिला नापसंद ही क्यों न हो.’’ जब कोई उस पर उंगली उठाए तो उसके बचाव में आगे आएं.

शरीर को निशाना न बनाएं: लंबे समय से बॉडी शेमिंग उन महिलाओं से निपटने का तरीक़ा रहा है, जिन्हें हम पसंद नहीं करते. वह आपके साथ ख़राब व्यवहार कर रही है तो क्यों न उसे मोटी बुलाकर बदला लिया जाए? ‘‘एक बार मैंने एक असाइन्मेंट को ठीक से नहीं करने के लिए एक इंटर्न को कड़ी फटकार लगाई थी,’’ बताती हैं ग्रैफ़िक डिज़ाइनर उन्नति तुरखिया. ‘‘वह जानती थी कि मैं सही हूं इसलिए उसने ख़ुद का बचाव तक नहीं किया. लेकिन दो घंटे बाद मैं कॉफ़ी मशीन की ओर से गुज़र रही थी, तब मैंने उसे किसी से कहते सुना कि मैं कितनी कुरूप हूं और पता नहीं किस आधार पर मेरे पुरुष बॉस ने मुझे नौकरी पर रख लिया. ‘कोई इतनी कुरूप महिला के साथ क्यों काम करना चाहेगा?’ बिल्कुल यही उसके शब्द थे. मुझे नहीं पता कि उससे अच्छी तरह से अपना काम करने की मेरी अपेक्षा से मेरे लुक का क्या लेना देना था?’’ कोई भी महिला त्रुटिरहित नहीं होती, पर हर महिला शानदार ज़रूर होती है!
*आग्रह पर नाम बदला गया है