क्यों बुरा नहीं है कैशुअल सेक्स? #loveromance
October 23rd, 2020 | Post by :- | 168 Views

कैशुअल (आकस्मिक) सेक्स को लंबे समय से ख़राब माना जाता रहा है और यह उन मनगढ़ंत परियों की कहानियों से भी अलग है, जिनमें-फिर उनका जीवन ख़ुशी-ख़ुशी बीता, जैसी बातें कही जाती हैं. लेकिन कैशुअल सेक्स रोमांचक व संतुष्टिदायक तो होता ही है, साथ ही इसमें ‘सच्चे प्यार’ का दिखावा करने की ज़रूरत भी नहीं होती. जानवर तो कैशुअल सेक्स की अवधारणा को ख़ुशी-ख़ुशी अपनाते हैं. उनके लिए सेक्स अन्य ज़रूरी जैविक आवश्यकताओं की तरह ही है. और दूसरी तरफ़ हमने सेक्शुअल आनंद को मानवजाति के क्रमिक विकास के साथ-साथ हमने इसमें भावनात्मक लगाव और पवित्रता को अनिवार्य बना दिया. ऐसा सेक्स, जिसमें भावनात्मकता और शुचिता का सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बोझ साथ न हो, उसे हम तिरस्कार और घृणा की दृष्टि से देखते हैं. ऐसा सेक्स, जो परिकथाओं की तरह नहीं चलता, उसे व्यंग्यात्मक ढंग से कैशुअल सेक्स का तमगा पकड़ा दिया जाता है. ऐसे पुरुष जो इस तरह के सेक्शुअल संबंधों में शामिल होता है प्लेबॉय कहलाता है और ऐसी महिलाओं को बुराभला कहा जाता है.

कैशुअल बनाम प्रतिबद्ध
जब बात अंतरंगता की हो तो हममें से हर एक को उस चीज़ का चुनाव करने का हक़ है, जो हमारे लिए सबसे बेहतरीन हो. पर ये भी सच है कि नए नज़रिए के प्रति उदार होने से ही हमारा निजी विकास बेहतर होता है. न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित एक शोध-पत्र में दावा किया गया है कि वन नाइट स्टैंड लोगों को बड़े पैमाने पर पुरस्कृत महसूस कराता है. ऐसे वॉलंटीयर्स जिन्होंने इस शोध में भाग लिया, उन्होंने १२ सप्ताह के लिए एक डायरी बनाई. जिसमें उन्होंने लिखा कि कैशुअल सेक्स के बाद उन्होंने कैसा महसूस किया. विश्लेषण करने पर पाया गया कि उनका तनाव का स्तर घटा, आत्मविश्वास का स्तर बढ़ा और उन्होंने जीवन के प्रति संतुष्टि महसूस की.

लेकिन सुरक्षित रहें
लेखिका रेचल डेल्टो अपनी किताब फ़्लर्ट फ़ीयरलेसली में कहती हैं कि अपनी ज़रूरतों और मान्यताओं का ईमानदार विश्लेषण इस बात में एक अहम् भूमिका निभा सकता है कि आप कैशुअल रिश्ते से क्या पाना चाहती हैं: ‘‘कैशुअल सेक्स का भरपूर आनंद पाने के लिए भरोसे, वाजिव अपेक्षाओं और स्पष्ट बातचीत करने की ज़रूरत होती है. आपको ये समझना होगा कि ये अनुभव केवल आप दोनों के बीच ही रहेगा और ये भी कि आप सुरक्षित ज़ोन में हों.’’ यह क़दम उठाना चाहती हैं तो अपने आचरण की ज़िम्मेदारी लेते हुए ऐसा करें, ना कि नशे में धुत्त होकर, ताकि किसी दूसरे पर दोषारोपण की स्थिति न आए. और सबसे ज़रूरी है कि आप अपने दिमाग़ में इस चेतावनी को ज़रूर याद रखें, चाहे आपकी लालसा कितनी भी बलवती ही क्यों न हो-प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करें.’’