दांपत्य में गुस्से से बचें …. #loveromance
November 8th, 2020 | Post by :- | 209 Views

‘सरगम, सरगम, सुनाई नहीं देता, कब से आवाज लगा रहा हूं। मेरी टाई कहां है? इस घर में कभी कोई चीज जगह पर नहीं मिलती, मैं तो तंग आ गया हूं। मेरा तो जीना मुश्किल हो गया है।’ आकर्षण अपनी ही रौ में बोलता जा रहा था, बिना इस बात की ओर ध्यान किए कि उसके इस रूखे व्यवहार से सरगम पर क्या असर पड़ रहा है।

सरगम किचन से आई तो देखा कि पूरा कमरा फैला पड़ा है। सारा सामान इधर-उधर बिखरा पड़ा है। वह चुपचाप टाई ढूंढऩे लगी। तकिए के नीचे से झांकती टाई को उसने उठा कर आकर्षण की अटैची पर रख दिया और बिना कुछ कहे रसोई में वापस चली गई।

टाई को अटैची पर रखा देख, पहले तो आकर्षण सकपका गया, फिर जल्द ही शांत हो चुपचाप दफ्तर चला गया। इस पूरे प्रकरण में सरगम शांत ही रही। यदि वह भी उस समय उलट कर जवाब दे देती तो वही छोटी सी बात विकराल रूप धारण कर लेती और तब सरगम और आकर्षण को भयंकर मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता।

अक्सर छोटी-छोटी बातों को ले कर पति-पत्नी इस हद तक झगड़ पड़ते हैं कि उनकी जिंदगी में सिर्फ तनाव ही रह जाता है जो उन पर इस हद तक हावी हो जाता है कि दोनों का एक छत के नीचे जीवन बसर करना मुश्किल हो जाता है और नौबत तलाक तक पहुंच जाती है।

आम जिंदगी में यदि पति-पत्नी कुछ बातों को ध्यान में रखें तो तनाव से बच कर अपने घरेलू जीवन को खुशियों से भर सकते हैं। यदि पति-पत्नी के बीच कभी झगड़ा हो तो दोनों में से एक को शांत हो जाना चाहिए जिससे बात आगे न बढ़े और फिर पति-पत्नी का झगड़ा तो पानी के बुलबुलों की तरह होता है जो पल भर में ही खत्म हो जाता है।

– पति-पत्नी को चाहिए कि वे एकदूसरे को समझें, एकदूसरे की भावनाओं की कद्र करें।

– अपने रिश्ते में ‘मैं’ को न आने दें।

– कभी-कभी चुप्पी भी बहुत कुछ ऐसी बातें कह जाती हैं जिन्हें बोलने से सिर्फ कड़वाहट ही पैदा हो और फिर इस तरह दूसरे तक आपका संदेश सहजता से पहुंच जाता है।

– घर का झगड़ा घर में ही सुलझा लें। बाहर वालों को इसकी भनक तक न लगने दें वरना बात बिगड़ सकती है।

– यदि पति को ऑफिस से आने में देर हो जाए तो इस पर उनसे लड़ें नहीं, न ही शक करें पर एकदम विश्वास भी न करें। सामान्य बनी रहें।

– कभी-कभी पत्नी की नाजायज मांगों से तंग आ कर भी पति कुंठित हो जाते हैं (यदि वे उनकी मांगें पूरी कर पाने में असमर्थ हों ) जिस कारण झगड़े होते हैं।

– पत्नी को पति की सीमित आय में रहना सीखना चाहिए और सुखमय जीवन व्यतीत करना चाहिए।

– एकदूसरे को ताना न दें, जैसे मुझे तो बहुत अमीर घरानों के रिश्ते आ रहे थे। मैं तो तुम से विवाह करके फंस गई आदि। इससे पति का आत्म सम्मान प्रभावित होता है जो अंतत: झगड़े का प्रमुख कारण बनता है।

– पति-पत्नी दोनों एकदूसरे को हर रूप में अपनाएं।

– दोनों ही एकदूसरे की इच्छाओं की कद्र करें और एकदूसरे के माता-पिता को समान रूप से सम्मान दें। अक्सर पति-पत्नी के बीच झगड़े का एक बड़ा मुद्दा माता-पिता के सम्मान को ले कर ही होता है।

– पति-पत्नी आपस में समर्पित रहें, अपनी इच्छाओं को दबाएं नहीं, व्यक्त करें मगर उन्हें एकदूसरे पर थोपें नहीं।

– कभी भी एकदूसरे के अतीत को न कुरेदें। आपका भविष्य ज्यादा महत्त्व रखता है। कल आप क्या थे, इस पर झगडऩा बेवकूफी है। आज आप क्या हैं और आज के आधार पर कल क्या होंगे, ज्यादा महत्त्व रखता है।

– याद रखें कि पति का ही घर आपका घर है। उसमें रम जाएं। हर समय मायके की बड़ाई और सास या ननद की शिकायतें ही न करती रहें। दफ्तर से थके आए पति का स्वागत एक प्यार भरी मुस्कान से कीजिए न कि शिकायतों से वरना वह भी तनाव से घिर जाएंगे और हासिल कुछ होगा नहीं सिवा आप दोनों के झगड़ों के।

– अगर कोई बात आपको तकलीफ पहुंचा रही है तो शांत हो कर, आराम से अपने पति से बातचीत करें। झगड़ा किसी परेशानी का हल नहीं बल्कि तनाव की जड़ है।

नवविवाहित जोड़े धीरज और साक्षी का कहना है कि हमारी शादी को अभी सिर्फ आठ महीने ही हुए हैं। चूंकि हमने अंतरजातीय विवाह किया है इसलिए हमारे बीच रहन-सहन व खान-पान पर कभी-कभी अकारण ही बहस हो जाती है मगर बाद में हम दोनों एकदूसरे से सॉरी कह कर मान-मनुहार कर लेते हैं या फिर दोनों में से एक चुप हो जाता है, इस तरह झगड़ा टल जाता है और फिर इतनी आपसी समझ तो हर दंपति में होनी ही चाहिए।

यदि आप इन चंद सुझावों को ध्यान में रखें तो पारिवारिक जीवन में झगड़े जैसी समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी। यह रिश्ता समर्पण और विश्वास की नींव पर ही टिका है। जहां दरार आई, वहीं इस पाक रिश्ते के चिथड़े उड़ जाते हैं, फिर कुछ नहीं बचता सिवा तन्हाइयों के। ऐसी नौबत न आए, इसके लिए अपने गुस्सेे पर काबू रखना सीखें और खुशहाल जीवन व्यतीत करें।

– नरेन्द्र देवांगन