दादा-दादी और नाना-नानी के साथ बिताया हुआ समय बच्‍चों के लिए होता है खास … #loveromance
November 8th, 2020 | Post by :- | 116 Views

माता-पिता बनने के बाद जब लोग ग्रैंड पैरंट्स बन जाते हैं, तो बच्चों को लेकर उनका लाड और भी ज्यादा बढ़ जाता है। अक्सर देखा जाता है कि दादा-दादी या नाना-नानी से मिलने की बात से ही बच्चा भी चहक सा जाता है और उसकी खुशी ही बताती है कि उसके लिए उसके ग्रैंडपैरंट्स कितने मायने रखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके पैरंट्स की बच्चों से नजदीकी उन्हें ज्यादा खुश रखने के साथ ही उनकी उम्र को बढ़ाने में भी मदद कर सकती है? चलिए जानते हैं इन फायदों के बारे में:

मेमरी तेज करने में मदद

साल 2016 में ऑस्ट्रेलिया में हुई एक स्टडी में सामने आया था कि जो ग्रैंडपैरंट्स सप्ताह में कम से कम एक बार अपने ग्रैंडकिड्स के साथ टाइम स्पेंड करते हैं, उन्हें अल्जाइमर का खतरा कम होता है। साथ ही में यह याद्दाश्त को बरकरार रखने में भी मदद करता है। दरअसल, बच्चों के साथ खेलने के दौरान उनके द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के कारण ग्रैंडपैरंट्स चीजें याद रखने की कोशिश करते हैं, इससे उन्हें मेमरी बूस्ट में मदद मिलती है।

इमोशनल हेल्थ

बच्चों के साथ खेलने या उनको देखकर ही मिलने वाली खुशी ग्रैंडपैरंट्स को इमोशनली हेल्दी रहने में मदद करती है। बढ़ती उम्र के कारण लोगों से होती दूरी और बच्चों के व्यस्त शेड्यूल के कारण माता-पिता को अकेलापन महसूस होने लगता है, जो उन्हें डिप्रेशन का शिकार भी बना सकता है। वहीं अगर वे अपने ग्रैंडकिड्स के साथ रहें, तो उन्हें इस दूरी का उतना पता नहीं चलता है।

बढ़ती है उम्र

Evolution and Human Behavior जर्नल में पब्लिश स्टडी के लिए की गई रिसर्च में सामने आया था कि जो ग्रैंडपैरंट्स अपने ग्रैंडकिड्स के साथ समय बिताते हैं, वे उन लोगों को मुकाबले ज्यादा जीते हैं, जो अपने पोते-पोती या नाती-नातिन के साथ समय नहीं बिता पाते। हालांकि, इसी स्टडी में इस बात पर भी जोर दिया गया था कि ग्रैंडपैरंट्स पर ग्रैंडकिड्स को संभालने के लिए जोर नहीं डालना चाहिए, नहीं तो यह हैपी टाइम उनके लिए स्ट्रेस की वजह बन सकता है।

बच्चों को भी उतना ही फायदा

अपने पैरंट्स के माता-पिता के साथ समय बिताना बच्चों के लिए भी अच्छा होता है। Boston University द्वारा करवाई गई स्टडी में सामने आया था कि ग्रैंडपैरंट्स के साथ समय बिताने वाले बच्चे इमोशनली ज्यादा स्टेबल होते हैं। साथ ही यह उन्हें ज्यादा समझदार व बेहतर स्पीकर बनने में भी मदद करता है। स्टडी में यह भी सामने आया कि दादा-दादी या नाना-नानी के साथ समय बिताने वाले बच्चों में डिप्रेशन होने की आशंका भी कम रहती है।