लड़कियों की ये गलतफहमियां भी ज़िम्मेदार है लड़कों की बुरी इमेज के लिए. … #loveromance
November 11th, 2020 | Post by :- | 212 Views

लड़कियों को लड़के गलत समझते है या फिर लड़कियों के बारे में अक्सर लड़कों को ग़लतफ़हमी होती है.

ऐसी बातें अक्सर पढने, देखने और सुनने को मिलती रहती है.

और बहुत हद तक ऐसी बाते सही भी होती है. पर कभी ये सोचा है की लड़कों के बारे में भी कुछ गलतफहमियां है जो अमूमन हर लड़की को होती है, फिर चाहे वो जताए या छुपाये. देखते है कौनसी है ऐसी कुछ गलतफहमियां जो लड़कियों को होती है जो लड़कों की बुरी इमेज के लिए जिम्मेदार होती है.

बिखरे बाल, खोयी आँखें, बेख्याली मतलब ड्रग्स का आदी  ये सबसे आम गलतफहमियों में से एक है, अगर कोई लड़का बेतरतीब ढंग से कपडे पहने, बालों को बिना संवारे और खुद में ही खोया खोया रहता है तो लड़कियों का पहला सवाल या फिर पहला ख्याल ही ये होता है.. तुम नशा करते हो ?

ये बात अधिकतर सही नहीं होती. बहुत से लड़के ऐसे भी होते है जिन्हें बनना संवारना पसंद नहीं और वो अपने ख्यालों में ही खोये रहते है और किसी की परवाह नहीं करते. वो थोड़े अलग ज़रूर होते है पर ड्रग्स के आदी नहीं.

बढ़ी दाढ़ी, घूरती आँखें, मैले कपडे मतलब क्रिमिनल – इस तरह की ग़लतफ़हमी अक्सर सड़क पर या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में होती है. जब किसी लड़की के आस पास इस तरह का दिखने वाला मर्द आ जाता है. लड़कियों का पहला ख्याल यही होता है कि ये शक्ल से ही गुंडा लग रहा है ना जाने किस परेशानी में डाल दे या क्या हरकत कर दे.

गीक कभी अच्छे प्रेमी नहीं होते –  इसे फिल्मों और टीवी का दोष कहलो या मानसिकता. चश्मा लगाये, या शांत स्वाभाव के लड़के जो घंटो अपना समय किताबों या कंप्यूटर के साथ बिताते है वो कभी रिलेशनशिप के लिए अच्छा ऑप्शन हो ही नहीं सकते. ऐसा मानना है बहुत सी लड़कियों का. पर असल में सच इस से बिलकुल उलट है.

गीक्स रिलेशनशिप के लिए सबसे बेहतर होते है. इसके कई कारण है पहला गीक्स अक्सर अकेले रहते है तो जब उन्हें किसी का साथ मिलता है तो उनका पूरा ध्यान उस खास पर ही रहता है दूसरा गीक्स ज्ञान और इनफार्मेशन का भण्डार होते है . उनसे बात करके कभी बोर नहीं फील होता. तीसरा गीक्स अक्सर विश्वसनीय होते है वो जल्दी धोखा नहीं  और बनावटी नहीं होते

रेल बस में अनारक्षित सीट खाली नहीं करने वाले बदतमीज़ और असभ्य है –  ये सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी होती है. जब भी कोई लड़की भरी हुयी बस,ट्रेन, या मेट्रो में किसी लड़के को देखती है और वो सीट नहीं छोड़ता तो ना सिर्फ वो लड़की अपितु आस पास के लोग भी उस लड़के को असभ्य और बदतमीज़ समझते है.

पर हर बार ये सच हो ऐसा नहीं है, अगर कोई लड़का अनारक्षित सीट पर बैठा है और कोई लड़की जो स्वस्थ है सिर्फ इसलिए सीट चाहती है कि वो लड़की है तो ये गलत है , हो सकता है वो लड़का अस्वस्थ हो या फिर कहीं दूर से सफर करके थका हारा हो या फिर 10 घंटे ऑफिस में काम करके घर जा रहा हो. इन परिस्थितियों में अगर वो सीट ऑफर नहीं करता है तो उसे असभ्य या बदतमीज़ समझना गलत है.

वो दोस्ती का नाटक करता है पर असल में मुझे पसंद करता है –  ये भी सबसे सामान्य गलतफहमियों में से एक है. जब कोई लड़का किसी लड़की का ख्याल रखता है, उसके साथ वक्त बिताना चाहता है या बात करना चाहता है तो बहुत सी लड़कियों को लगता है कि ये दोस्ती नहीं है वो लड़का शायद पसंद करने लगा है.

कुछ वाकयों में ये बात सही हो भी सकती है पर इसका मतलब ये नहीं की हर बार ही ये बात सही हो. बहुत बार ऐसा भी होता है की लड़के का लगाव सिर्फ एक अच्छे दोस्त की तरह ही होता है और आप उसके बारे में ना जाने क्या क्या सोच लेती है.

इस तरह की कई गलतफहमियां है जो लड़कियों को कुछ खास किस्म के लड़कों के बारे में होती है और कभी कभी इन गलतफहमियों की वजह से एक अच्छा लड़का भी किसी लड़की की नज़र में गलत बन जाता है.