यह केवल समय का खेल नहीं है ……
November 17th, 2020 | Post by :- | 198 Views

पायल सिंह* और उनके बॉयफ्रेंड पिछले पांच साल से रिश्ते में हैं,‘‘हमारी सेक्स लाइफ़ बहुत अच्छी है. हम सप्ताह में चार बार तो सेक्शुअल संबंध बनाते ही हैं.” वे आगे बताती हैं,‘‘पहले हम कंडोम का इस्तेमाल करते थे, पर एक दिन हमने देखा कि हमारे पास ये ख़त्म हो गया है, तो भी हम बेपरवाह होकर आगे बढ़ गए. उस दिन से हम असुरक्षित सेक्शुअल संबंध ही बनाते हैं, क्योंकि वे बिल्कुल सही समय पर विद्ड्रॉ कर लेते हैं. यह तरीक़ा हम पिछले दो साल से अपना रहे हैं. और हमें लगता है कि ये हमारे लिए उपयुक्त तरीक़ा है.”
पायल की तरह कई कपल्स गर्भधारण से बचने के लिए इजेकुलेशन से ठीक पहले विद्ड्रॉल का तरीक़ा अपनाते हैं. पर क्या ये वाकई सुरक्षित तरीक़ा है?
रुकावट के लिए ख़ेद है
सेक्स काउंसलर डॉ महेंद्र वत्स के अनुसार, इजेकुलेशन से ठीक पहले पीनिस को बाहर निकाल लेना दुनियाभर में गर्भधारण से बचने के लिए सबसे ज़्यादा अपनाया जाने वाला तरीक़ा है. ‘‘प्रेग्नेंसी की अधिकांश घटनाएं दुर्घटनावश नहीं होतीं, जैसा कि अक्सर कहा जाता है. इसका ये मतलब नहीं कि विद्ड्रॉल के तरीक़े का समर्थन कर रहा हूं.” वे कहते हैं, ‘‘भले ही लोग ये क्यों न सोचते हों कि उन्हें विद्ड्रॉल का सही समय पता है, पर यह गर्भधारण से बचने का सही तरीक़ा नहीं है. पुरुषों में इजेकुलेशन से पहले भी कुछ मात्रा में सीमन बाहर आ जाता है यानी यदि आपका साथी विद्ड्रॉ कर ले तब भी आपके गर्भधारण की संभावना बनी रहती है. साथ ही, यदिि वे वेजाइना के नज़दीक ही इजेकुलेट करते हैं तो स्पर्म्स तैरकर अंदर जा सकते हैं. ऐसे जोड़े जो अपूर्ण इंटरकोर्स पर भरोसा करते हैं, उनके साथ दुर्घनावश प्रेग्नेंट होने की ज़्यादा संभावना होती है, क्योंकि ड्यू ड्रॉप्स जो पुरुष के उत्तेजित होने पर इजेकुलेशन से काफ़ी पहले निकलता है, में भी स्पर्म्स के होने की संभावना होती है. विद्ड्रॉल मेथड की असफलता की दर सालाना 27 प्रतिशत तक होती है. इसका अर्थ है कि इस तरीक़े को इस्तेमाल करने वाले चार कपल्स में से एक हर साल इसकी असफलता का शिकार होता है.” वे बताते हैं कि अधिकतर पुरुषों के लिए ये समझ पाना मुश्क़िल होता है कि विद्ड्रॉ करने का सही समय क्या है या सेक्स के दौरान ऐसा करने की उनकी इच्छाशक्ति भी कम हो जाती है. साथ ही इस तरीक़े की वजह से सेक्शुअल संबंधों का आनंद भी कम होता है, क्योंकि सारा ध्यान इस बात पर लगा रहता है कि कब विद्ड्रॉ करना है. ‘‘यह महिलाओं के लिए असंतुष्टिदायक हो सकता है, क्योंकि सेक्स की प्रक्रिया अचानक रुक जाए तो वे ऑर्गैज़्म तक नहीं पहुंच पातीं.”