क्या आप सेक्स से ज़्यादा खाने के बारे में सोचती हैं! …
November 17th, 2020 | Post by :- | 90 Views

हम महिलाएं भोजन में ज़्यादा कैलोरीज़ को लेकर हमेशा सतर्क रहती हैं. पर ऐसा लगता है कि हम पर इसकी धुन ज़रूरत से कहीं ज़्यादा सवार हो चुकी है. महिलाएं अपने रिश्तों को संवारने से कहीं ज़्यादा मेहनत डायटिंग करने पर करती हैं. ये बात एक सर्वे में सामने आई है. सर्वे में ब्रिटेन की 1,290 ऐसी महिलाओं ने भाग लिया था, जो डाय‌टिंग कर रही थीं. सर्वे में देखा गया कि डाय‌टिंग उनके रिश्ते को कैसे प्रभावित कर रही है. इसके नतीजे चौंकाने वाले थे. लगभग 54 प्रतिशत महिलाओं ने माना कि वे अपने रिश्ते को निभाने से कहीं ज़्यादा मेहनत डायटिंग के लिए कर रही हैं. लगभग 10 प्रतिशत महिलाओं ने तो ये भी माना कि यदि वे अपने पार्टनर से धोखा करेंगी तो भी उन्हें उतना दुख नहीं होगा, जितना कि अपनी डायटिंग से विचलित होने पर होता है.

भारतीय महिलाएं
भारतीय परिदृश्य में ये बात कितनी सच है? ”महिलाएं, फिर चाहे वो भारतीय हों या दूसरे किसी देश की, अक्सर ख़ुद को इस दृष्टिकोण से देखती हैं कि पुरुष और दूसरी महिलाएं उनके बारे में क्या विचार रखते हैं.” यह कहना है काउंसलर व लाइफ़ कोच सुजाता बालकृष्णन का. ”बॉयफ्रेंड/पति यह ज़रूर चाहेगा कि उसकी पार्टनर अपना ध्यान रखने में आलस ना करे. यदि महिलाएं अपने शरीर का अच्छी तरह ध्यान नहीं रखतीं तो उन्हें डिप्रेशन व स्वास्थ्य से जुड़ी दूसरी समस्याएं हो सकती हैं. जैसे-आत्मविश्वास में कमी और इस वजह से उनका रिश्ता प्रभावित हो सकता है. फिर भी यदि हम चाहते हैं कि कोई दूसरा हमें पसंद करे तो उससे पहले हमें ख़ुद को पसंद करना सीखना होगा.”
सेक्स विशेषज्ञ डॉ महेंद्र वत्स इस सर्वे को सेक्स के बजाय भारत में महिलाओं की स्थिति से जोड़कर देखते हैं. ”हमारे देश में अधिकतर महिलाएं अपने परिवार के सदस्यों को अपने हाथों से बना खाना खिलाती हैं. वो दिनभर घर और खाना पकाने से जुड़े काम ही करती रहती हैं. ऐसे में उनके दिमाग़ में भोजन के अलावा दूसरा कुछ कैसे आ सकता है. डॉ वत्स बताते हैं फिर इस अध्ययन में तो ऐसी महिलाओं को लिया गया है जो डायटिंग पर थीं. जब आप डायटिंग करते हैं तो ख़ुद को अपने पसंदीदा भोजन से वंचित रखते हैं. ये दमन आनेवाले विस्फोट का संकेत है. ऐसे में तो आप हर वक़्त भोजन के बारे में ही सोचेंगे.”

भोजन खाएं, प्यार करें
नृत्यांगना मल्लिका इनासु इस सर्वे को अजीबोग़रीब मानती हैं. ”भोजन आराम देता है और सेक्स मुक्ति. मुझे नहीं लगता कि जब तक इनमें से किसी एक चीज़ के प्रति उन्हें दीवानग़ी न हो, लोग इनमें से किसी के भी बारे में लगातार सोच सकते हैं.” वे कहती हैं ,”यदि मैं भूखी हूं, तो तब तक सिर्फ़ भोजन के बारे में ही सोचूंगी, तब तक मेरी भूख न मिट जाए. इसी तरह यदि मेरा मन अपने बॉयफ्रेंड का सामीप्य पाने का है तो मैं उसी के बारे में सोचूंगी. हां, कहा जाता है कि सेक्स के बाद भूख लगती है तो फिर सेक्स के बाद मैं भोजन के बारे में सोचूंगी.”