क्या वाकई जी-स्पॉट का अस्तित्व होता है! …
November 17th, 2020 | Post by :- | 113 Views

साल 1944 में जर्मन गायनाकोलॉजिस्ट अर्नस्ट ग्रैफ़ेनबर्ग ने महिलाओं के इस सबसे अच्छे दोस्त ‘जी-स्पॉट’ की खोज की थी और इसका नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया है. ये वेजाइना में स्थित एक बहुत-ही संवेदनशील हिस्सा बताया जाता है. जहां करोड़ों महिलाएं कहती हैं कि उन्होंने जी-स्पॉट के आनंद का अनुभव लिया है, वहीं इसका अस्तित्व अब तक रहस्य बना हुआ है.

यह अध्ययन कहता है ‘ना’

किंग्स कॉलेज लंदन में कुछ समय पहले हुए एक शोध ने दावा किया कि जी-स्पॉट के अस्तित्व का कोई प्रमाण नहीं है. ”इस अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि जी-स्पॉट का अस्तित्व व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है.” यह कहना है टिम स्पेक्टर का, जो इस शोध के को-ऑर्थर हैं. यह शोध ब्रिटेन की ऐसी 1800 महिलाओं के सर्वे पर आधारित है, जो एक जैसी दिखनेवाली और एक जैसी न दिखने वाली जुड़वा थीं. एक जैसी दिखनेवाली जुड़वा बहनों के सभी जीन्स समान होते हैं, जबकि एक जैसी न दिखने वाली जुड़वा बहनों के 50 फ़ीसद जीन्स समान होते हैं. ऐसे में एक जैसी दिखने वाली बहनों में से यदि एक बहन जी-स्पॉट के अनुभव को स्वीकारती है, तो दूसरी को भी वैसा ही महसूस होना चाहिए. पर ऐसा नहीं हुआ.

डॉक्टर्स कहते हैं ‘हां’
अधिकतर डॉक्टर्स, जिनसे हमने बात की इस अध्ययन से असहमत थे और उन्होंने कहा कि जी-स्पॉट का अस्तित्व होता है. सेक्शुअल हेल्थ फ़िहज़ीशियन डॉ दीपक जुमानी कहते हैं,”जी-स्पॉट बहुत संवेदनशील और आनंद देने वाला हिस्सा है. इसके अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता.” वे बताते हैं कि कई अध्ययनों से पता चला है कि यह वेजाइना का वह हिस्सा है, जहां वेजाइना के दूसरे हिस्सों की तुलना में कहीं ज़्यादा नर्व सेंटर होते हैं. जब इसे उत्तेजित किया जाता है तो रक्त संचार में बढ़ोतरी की वजह से आनंद महसूस होता है. ”जिन महिलाओं को अपने जी-स्पॉट के बारे में पता नहीं चलता, वे इसके अस्तित्व को नकारती हैं.” वे बताते हैं, ”पर जी-स्पॉट का पता न चल पाने की प्रमुख वजह हैं धूम्रपान, ड्रिंक करना या फिर तनाव.”