फर्टिलिटी से जुड़े मिथक जिन्हें आप सच मानते हैं …
November 18th, 2020 | Post by :- | 106 Views

बहुत सी दंपति ऐसी हैं जो गर्भधारण की कोशिश कर रही हैं और प्रेग्नेंसी की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए हर मुमकिन काम कर रही हैं। ऐसी स्थिति में लोग कुछ भी करने को तैयार होते हैं। किसी की भी बात को सच मान लेते हैं। इसी कारण लोग ऐसी कई बातों को भ्रम में सच मान लेते हैं जो असल में झूठ होती हैं। फर्टिलिटी से जुड़े भी कुछ मिथक ऐसे ही हैं जिनपर लोगों को विश्वास होता है कि वो सच हैं लेकिन ये सिर्फ एक भ्रम है। इन पर विश्वास करके आप अपने कंसीव करने की संभावनाओं को घटा सकते हैं। बेहतर है कि आप जान लें कि फर्टिलिटी से जुड़े वो मिथक जिन्हें आप सच मानते आए हैं।

मिथक: गर्भधारण के लिए ऑर्गाज्म होना जरुरी है
ऑर्गाज्म से आपको आनंद की प्राप्ति होती है लेकिन ऐसा नहीं है कि आपको गर्भधारण के लिए ऑर्गाज्म का अनुभव करना जरुरी है। ऑर्गाज्म के ना होने पर भी आप कंसीव कर सकते हैं।

मिथक: एक मासिक धर्म चक्र के बाद आप दो बार ओव्यूलेट कर सकती हैं
ऐसा नहीं है और अगर आप इस बात पर विश्वास करते हैं तो सच जान लें। आप एक ही मैंस्ट्रयुअल साइकिल के दौरान दो एग रिलीज कर सकती हैं लेकिन दो बार ओव्यूलेशन का होना मुमकिन नहीं होता। ओव्यूलेशन के दौरान आपके शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं जिससे अगले सप्ताह फिर से ओव्यूलेट करना मुश्किल होता है।

मिथक: आपका आहार फर्टिलिटी को प्रभावित नहीं करता
बहुत बार आप सोचते हैं कि आपका खान-पान आपकी प्रजनन क्षमता और कंसीव करने के प्रोसेस को प्रभावित नहीं है। हालांकि आपकी डाइट आपकी फर्टिलिटी के लिए अहम है। आपकी डाइट से आपको पोषण मिलता है और यही पोषण फर्टिलिटी को प्रभावित करता है।

मिथक: स्तनपान कराने से गर्भनिरोध होता है
यह सच है कि स्तनपान के दौरान महिलाओं को मासिक धर्म चक्र का सामना नहीं करना पड़ता और महिलाएं इस दौर में कम फर्टाइल होती हैं। लेकिन हर महिला के साथ ऐसा ही हो, ये जरुरी नहीं है। इसलिए गर्भनिरोध के लिए केवल स्तनपान पर निर्भर ना रहे।

मिथक: नियमित मासिक धर्म है तो कंसीव करने में दिक्कत नहीं होगी
अगर आपको नियमित मासिक धर्म चक्र होते हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि आपको गर्भधारण करने में किसी तरह की परेशानी नहीं हो सकती है। नियमित मासिक धर्म चक्र इस बात का वायदा नहीं करते हैं कि आपको कोई छुपी हुई समस्या नहीं हो सकती है जिसके कारण आपकी फर्टिलिटी प्रभावित हो।