पीरियड सेक्स से जुड़ी 5 आम ग़लतफ़हमियां, जिनका दूर होना ज़रूरी है
August 21st, 2020 | Post by :- | 233 Views

पीरियड सेक्स से जुड़े मिथक
पीरियड सेक्स को लेकर कई ग़लतफ़हमियां और धारणाएं हैं. सबसे बड़ी धारणा यह है कि इस दौरान सेक्स करने से आप प्रेग्नेंट नहीं होतीं. दूसरी धारणा यह है कि इस दौरान ब्लीडिंग इतनी हैवी होती है कि सेक्स का आनंद ले पाना संभव नहीं होता. इसके अलावा भी इस दौरान सेक्शुअल संबंध बनाने या बनाने को सही-ग़लत की कैटेगरी में रखनेवाली कई बातें हैं. जिनमें से हम कुछ बातों पर यहां बात करने जा रहे हैं, ताकि आपको अगर पीरियड के दौरान सेक्स करना हो तो बेफ़िक्र होकर कर सकें और अगर नहीं भी करना हो तो मन में कोई ग़लतफ़हमी न रह जाए.

पीरियड सेक्स पहली ग़लतफ़हमी: हैवी ब्लीडिंग के चलते सेक्स करना संभव नहीं हो सकता
कई महिलाएं पीरियड सेक्स का भरपूर लुत्फ़ उठाती हैं, पर अगर आप यह मानने वालों में से हैं कि हैवी ब्लीडिंग के चलते सेक्स करना संभव नहीं है तो यह बात पूरी तरह सही नहीं है. अगर ब्लड फ़्लो बहुत ज़्यादा न हो तो आप नॉर्मली सेक्स कर सकती हैं. वहीं अगर हैवी ब्लड फ़्लो हो, किंतु आपकी इच्छा हो रही हो तो बेड पर टॉवेल रखकर सेक्स कर सकती हैं. सेक्स बाद तुरंत साफ़-सफ़ाई कर लें, उसके लिए टिशूज़ पास रखें. वहीं अगर आप पीरियड्स के तीसरे या चौथे दिन संबंध बनाती हैं तो इतनी दिक़्क़तों का सामना नहीं करना पड़ेगा.

पीरियड सेक्स दूसरी ग़लतफ़हमी: पीरियड के दौरान सेक्स करने से आप प्रेग्नेंट नहीं होंगी
यह सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी है, जिसका शिकार हज़ारों महिलाएं हो जाती हैं. सेक्स के दौरान कॉन्डम जैसे प्रोटेक्शन इस्तेमाल करने को लेकर बहुत सारे जोड़े सहज नहीं होते. उन्हें लगता है कॉन्डम लगाकर सेक्स करने से सेक्स का एन्जॉयमेंट नहीं मिल पाता. ऐसे जोड़े पीरियड्स का इंतज़ार करते हैं, क्योंकि यह पुरानी मान्यता है कि पीरिड्स के दौरान संबंध बनाने से प्रेग्नेंसी पॉसिबल नहीं है. अगर आप भी इसी तरह के लोगों में से हैं तो आपको यह समझना होगा कि आप ख़ुद को बड़े ख़तरे में डाल रही हैं. ख़ासकर अगर आपके पीरियड्स नियमित नहीं आते तो प्रेग्नेंसी का ख़तरा बढ़ जाता है. चूंकि स्पर्म महिला के शरीर के अंदर पांच दिनों तक जीवित रह सकता है, अगर आपके पीरियड्स अनियमित हैं तो आप बड़ा ख़तरा मोल ले रही हैं.

पीरियड सेक्स तीसरी ग़लतफ़हमी: इस दौरान पेनिट्रेशन से ब्लड फ़्लो और हैवी हो जाता है
कई महिलाएं पीरियड के संभावित दिन के आसपास सेक्स नहीं करतीं, उन्हें लगा है कि इससे उनके पीरियड्स जल्दी आ जाएंगे. यही डर पीरियड्स के चौथे और पांचवें दिन सेक्स करने से जुड़ा हुआ है. उन्हें लगता है कि फ़्लो दोबारा हैवी हो जाएगा. कई शोधों में यह पाया गया है कि सेक्स करने के बाद पीरियड तभी पीरियड जल्दी आता है, जब पीरियड एक-दो दिन में आनेवाला होता है. वह भी सभी महिलाओं में ऐसा नहीं होता. तो इस बारे में पक्के तौर पर कुछ भी कह पाना संभव नहीं है. वहीं पीरियड्स का फ़्लो हैवी होने की बात करें तो यह सच है कि पीरियड्स के दौरान सेक्स करने के बाद थोड़ा-सा ब्लड फ़्लो बढ़ जाता है, पर इसका संबंध आपके ऑर्गैज़्म से है. क्योंकि ऑर्गैज़्म के चलते यूटरस सिकुड़ जाता है. पर दोनों ही केसेस में इतना अधिक ब्लड फ़्लो नहीं बढ़ता कि आपको किसी भी तरह की असुविधा या असहजता हो.

पीरियड सेक्स चौथी ग़लतफ़हमी: पीरियड्स में सेक्स करने से आपको क्रैम्स आ सकते हैं और पीरियड का दर्द बढ़ सकता है
यह तो पूरी तरह से ग़लतफ़हमी में ही काउंट होगा, क्योंकि ज़्यादातर महिलाएं पीरियड्स के दौरान सेक्स करने के बाद क्रैम्प्स में कमी का अनुभव करती हैं. पीरियड का दर्द भी कम होता है, क्योंकि ऑर्गैज़्म के चलते दर्द कम करनेवाले हार्मोन का सिक्रेशन बढ़ जाता है. साथ ही अच्छा महसूस करानेवाला हार्मोन एन्डॉर्फ़िन भी अच्छी ख़ासी मात्रा में रिलीज़ होता है. तो अगर पीरियड के दौरान सेक्स न करने का कारण यह डर हो तो उसे दिमाग़ से निकाल दें.

पीरियड सेक्स पांचवीं ग़लतफ़हमी: इस दौरान सेक्स करना बेहद दर्दनाक होता है
बिल्कुल भी नहीं. आपको जिस किसी ने भी यह बताया है या आपने जहां कीं भी यह पढ़ा है उसे भूल जाएं. देखा जाए तो पीरियड के दौरान निकलनेवाला ब्लड अपने आप में एक बेहतरीन नैचुरल लुब्रिकेंट का काम करता है. इसके चलते उन महिलाओं में भी, जिन्हें आम दिनों में लुब्रिकेशन की समस्या होती है, पीरियड्स के दौरान पेनिट्रेशन में कोई प्रॉब्लम नहीं होती. इसके अलावा पीरियड्स के दौरान सेक्स हार्मोन टेस्टेस्टेरॉन का लेवल काफ़ी हाई होता है इसलिए सेक्स और भी आनंद दायक हो जाता है. यही कारण है कि अक्सर आपको पीरियड्स ख़त्म होते ही सेक्स करने की तीव्र इच्छा होने लगती है.
नोट: यहां हमने ग़लतफ़हमियों के बारे में बात की है, आपको पीरियड्स के दौरान सेक्स करना चाहिए या नहीं यह आपकी निजी इच्छा पर निर्भर है. हमारा बताने का बस यही उद्देश्य था कि आपका मन करे तो कर सकती हैं, बजाय मन को ज़बरन शांत करने के. और हां, अगर कोई दिक़्क़त आए तो अपने गायनाकोलॉजिस्ट से तुरंत मिलें.