ख़ुशहाल रिश्ते के लिए प्लैन ‘सी’
August 21st, 2020 | Post by :- | 133 Views

जब इन दिनों हम सभी अपने घरों में बंद हैं. पार्टनर और परिवार के साथ ज़्यादा समय बिता रहे हैं. एक समय बाद रिश्ते में झुंझलाहट आ ही जाती है. कहा तो यह जा रहा है कि घर में अधिक समय साथ बिताने के चलते चाइना में पति-पत्नी के बीच अलगाव की घटना बढ़ रही है. हालांकि भारत में अभी तक ऐसे किसी भी मामले की पुष्टि नहीं हुई है, पर हम नहीं चाहते कि लगभग एक महीने तक लगातार एक-दूसरे के साथ रहने के बाद आप दोनों इस तरह के किसी क़दम के बारे में सोचें भी न.
ख़ुशहाल रिश्ते का प्लैन ‘ए’ हर किसी के पास होता है, प्लैन ‘बी’ है दूसरों के बिखरते रिश्ते को देखकर अपने रिश्ते को मज़बूत करने की कोशिश करना. पर जब चीज़ें ठीक नहीं हो रही होती हैं तो प्लैन ‘ए’ और ‘बी’ को नियम से फ़ॉलो करने के बाद स्थिति ख़राब हो ही जाती है. आपको इस तरह के हालत से न गुज़रना पड़े इसलिए प्लैन ‘सी’ के बारे में बात करने जा रहे हैं. अंग्रेज़ी के तीसरे अल्फ़ाबेट ‘सी’से शुरू होनेवाली ये तीन बातें किसी भी रिश्ते को गुलज़ार रखती हैं. तो क्या आप प्लैन ‘सी’ के लिए तैयार हैं?

प्लैन ‘सी’ का पहला स्टेप: कम्यूनिकेशन
कम्यूनिकेशन यानी बातचीत करते रहने से रिश्ता ख़ुशहाल रहता है. आप साथ रह रहे हों या दूर अगर आप दोनों बातचीत का क्रम भंग नहीं होने देंगे तो आपके रिश्ते में किसी तरह के रुकावट की आशंका काफ़ी हद तक कम हो जाएगी. जो भी ग़लतफ़हमियां होंगी, उनको दूर होने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा. कम्यूनिकेशन के कई तरीक़े हैं. ज़रूरी नहीं है कि हम शब्दों से ही बातें करें, कई दफ़े हमारी भाव-भंगिमा भी बहुत कुछ कह जाती है. जब आप दोनों अगले एक महीने के लिए एक ही जगह क़ैद हैं तो शरीर की भाषा बहुत इम्पॉर्टेन्ट हो जाती है. अगर इस भाषा को आपने सही रखा तो समझिए रिश्ते को बचाए रखने, उसे मज़बूत करने के पहले चरण को आपने पार कर लिया है.

प्लैन ‘सी’ का दूसरा स्टेप: कॉम्प्रोमाइज़
कॉम्प्रोमाइज़ यानी समझौता हमारे पर्सनल ही नहीं, हर तरह के रिश्ते के लिए बहुत ज़रूरी होता है. चाहे पर्सनल संबंध हों या प्रोफ़ेशनल नाता, ऐसा हमेशा नहीं हो सकता कि हम हर मुद्दे पर सहमत रहें. असहमति वैसे तो रिश्ते को मज़बूत बनाती है, पर बशर्ते उसे समझदारी और खुले दिल से देखा जाए. पर अक्सर लोग सहमति को रिश्ते की बली लेने देते हैं. आपके साथ ऐसा न हो इसलिए थोड़ा समझौता करना सीखें. समझौता करने का मतलब हार मान जाना या पीछे हट जाना नहीं होता. इसका मतलब होता है आगे बढ़ने के लिए नया रास्ता तलाशना. कभी-कभी सिचुएशन ऐसी हो जाती है कि अपनी बात पर टिके रहने से न तो आपका भला होता है और न ही रिश्ते का. हां, आपको अपने आत्मसम्मान को गिरवी रखकर समझौता नहीं करना चाहिए. यहां और एक बात आत्मसम्मान और ईगो दो अलग चीज़ें हैं. आत्मसम्मान का संबंध आपके नैतिक मूल्यों से होता है और ईगो आपके थोथेपन से उपजता है. तो रिश्ते की भलाई के लिए समझौता करने में कोई बुराई नहीं है.

प्लैन ‘सी’ का तीसरा स्टेप: कमिटमेंट
प्लैन ‘सी’ का तीसरा चरण है कमिटमेंट यानी प्रतिबद्धता. दुख में सुख में साथ निभाने की बात शादी के वक़्त महज़ कहने के लिए नहीं कही जाती. इसे अपने जीवन में उतारने की ज़रूरत होती है. इसका मतलब होता है जब रिश्ते में बुरा समय आए तो एक-दूसरे का साथ देना. अब जबकि आप दोनों छोटी-सी जगह पर क़ैद से हैं तो इस नज़दीकी का फ़ायदा उठाएं. एक-दूसरे से अपने मन की बात करें. आगे की योजनाओं के बारे में चर्चा करें. एक-दूजे के सपनों और योजनाओं को सुनें, समझें और उनको हक़ीक़त बनाने में अपने हिस्से का योगदान दें. यह सब संभव होग यदि आप दोनों कमिटमेंट वाले वैल्यू को सीरियसली फ़ॉलो करने की कोशिश करेंगे. जब आप आइसोलेशन पीरियड के बाद घर से निकलेंगे तो बेहतर कपल बनकर उबरेंगे.