एक रोमांचक यात्रा…अकेले!
December 11th, 2020 | Post by :- | 175 Views

आस्कमेन डॉट कॉम के एक सर्वेक्षण के नतीजों के मुताबि्क़ 84 प्रतिशत पुरुषों ने स्वीकार किया कि वे मास्टबेशन करते हैं. हालांकि महिलाओं से संबंधित इस आंकड़े का थोड़ा कम होना तो अपेक्षित था, पर हमें जिस बात ने चौंकाया वो ये कि महिलाओं के लिए यह आंकड़ा केवल १० प्रतिशत ही था. इस तथ्य के मद्देनज़र तो ये और भी अचरज भरा था कि मास्टबेशन के ज़रिए महिलाओं को सबसे सशक्त ऑर्गैज़्म (चरम-सुख) प्राप्त होता है. फिर हम इसे ज़्यादा क्यों नहीं करते? ‘‘मास्टबेशन एक मशीनी प्रक्रिया है,’’ यह कहना है वंदना सग्गू का. ‘‘इसमंि स्नेह तो शामिल है ही नहीं. सारी बात सिर्फ़ ऑर्गैज़्म तक ही सीमित है. और महिलाएं प्यार चाहती हैं. उनके लिए ऑर्गैज़्म उतनी अहमियत नहीं रखता.’’ वंदना के तर्क में दम तो है, लेकिन फ्रॉयड का मानना है कि युवा होती लड़कियां मास्टबेशन को अपने उन निराशाजनक अनुभवों से जोड़कर देखती हैं, जो पुरुषों के जननांगों से ख़ुद के जननांगों की तुलना करने पर उन्हें हुए थे. पर हम इस बात से इत्तफ़ाक नहीं रखते.
यौन रोग विशेषज्ञ डॉ राजन भोसले के अनुसार, संभव है कि मास्टबेशन करनेवाली महिलाओं की संख्या कहीं ज़्यादा हो, पर वे इस बारे में चर्चा न करना चाहती हों. मेरी गर्लफ्रेंड्स के बीच अचानक किए गए एक सर्वे में इस सच्चाई की पुष्टि भी हुई. जिन्होंने स्वीकार किया कि वे मास्टबेट करती हैं, उनमें से एक हैं ग्राफ़िक डिज़ाइनर कृतिका. ‘‘मुझे अचानक ही इस बारे में 13 वर्ष की उम्र में पता चला और मैं तब से ये करती हूं,’’ यह बताते हुए वो खुलासा करती हैं,‘‘पहले-पहल, मुझे इसके लिए ग्लानि हुई. पर बड़े होने पर धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि ये तो सेक्शुअल ऊर्जा को तृप्त करने का स्वस्थ तरीक़ा है.’’ डॉ भोसले मानते हैं कि बदलाव आया है. ‘‘महिलाएं इस बारे में चर्चा भले ही न करें, पर अब स्वीकारोक्ति बढ़ी है. मेरी कई महिला मरीज़, जिनमें आम महिलाओं से लेकर विख्यात शख़्सियतों तक का समावेश है, इस बारे में चर्चा करने से नहीं हिचकतीं.’’
यदि सशक्त ऑर्गैज़्म की प्राप्ति भी आपको इसके लिए नहीं उकसाती तो मास्टबेशन के कुछ अन्य फ़ायदों पर भी ग़ौर फ़रमाइए.

इससे गर्भाशय के कैंसर का खतरा घटता है
जोन ऐलिसन रॉजर्स ने अपनी क़िाताब इन सेक्स: अ नैचुरल हिस्ट्री में टेंटिंग की प्रक्रिया को समझाया है-जब ऑर्गैज़्म के दौरान गर्भाशय हाथी की सूंड़ की शक्ल ले लेता है. इसके भीतर मौजूद म्यूकस फैलता और सिकुड़ता है, जिससे गर्भाशय में मौजूद तरल पदार्थ की अम्लता बढ़ती है. इससे मित्र-जीवाणुओं (फ्रेंडली बैक्टीरियाज़) की संख्या बढ़ती है और यह तरल पदार्थ गर्भाशय से वेजाइना की ओर आ जाता है. जब गर्भाशय से ‘पुराना’ तरल पदार्थ बाहर आता है तो यह उन संक्रामक जीवाणुओं को भी अपने साथ बाहर ले आता है, जो  इन्फ़ेक्शन फैला सकते हैं.

इससे पीएमएस के लक्षणों में राहत मिलती है
कामोत्तेजना के दौरान महिला के शरीर से ऑक्सिटोसिन नामक रसायन स्रवित होता है, जो प्राकृतिक दर्द-निवारक का काम करता है.

इससे सेक्स अनुभव बेहतर बनता है
मास्टबेशन के ज़रिए आप अपने शरीर को जान सकती हैं, यह समझ सकती हैं कि सेक्स के दौरान आप अपने साथी से क्या चाहती हैं. इसके अलावा अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऑरेगन के एक शोध के दौरान पाया गया है कि मास्टबेशन महिलाओं के सेक्शुअल-डिस्फ़ंक्शन के इलाज में भी कारगर है. और सबसे अच्छी बात कि ये सुरक्षित सेक्स का सबसे बढ़िफया तरीक़ा है!

अपने शरीर को जानिए
अपनी क्लिटोरिस को स्वयं उत्तेजित कर मास्टबेशन किया जाता है. हालांकि यह वास्तव में 3.5 इंच लंबी होती है, पर इसका काफ़ी छोटा हिस्सा ही हम देख सकते हैं. यहां तक़रीब 8,000 नाड़िंयों का अंत होता है इसलिए यह हिस्सा स्पर्श के प्रति बहुत संवेदनशील होता है. वर्ष 2007 में ड्यूरेक्स के द्वारा कराए गए एक शोध में सामने आया है कि 13 प्रतिशत शहरी महिलाएं वाइब्रेटर्स का इस्तेमाल करती हैं.