प्रेग्नेंसी के दौरान सबकुछ लें, पर तनाव ना लें ..
August 21st, 2020 | Post by :- | 182 Views

प्रेग्नेंसी का दौर हर महिला के लिए भारी मानसिक और शारीरिक उतार-चढ़ाव से भरा होता है. जहां शरीर में बाहर से हो रहे बदलाव साफ़ दिखते हैं, वहीं हार्मोनल चेंजेस की वजह से भी काफ़ी कुछ बदलता है. ये नौ महीने थका देनेवाले और स्ट्रेसफ़ुल साबित हो सकते हैं, ख़ासकर अगर आप पहली बार मां बन रही हों. जितना अधिक आप स्ट्रेस लेंगी उतना ही ज़्यादा आपकी शारीरिक सेहत को भी नुक़सान पहुंचेगा. कई महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान ही पोस्ट प्रेग्नेंसी वेट लॉस, ऑफ़िस शुरू करने आदि के बारे में सोचने लगती हैं. देखिए, सोचने से कुछ नहीं होगा, हर चीज़ के लिए प्रकृति ने एक समय निश्चित किया है. उतना समय लगेगा ही. इसलिए अगर आप प्रेग्नेंसी के दौरान और बेबी के पैदा होने के बाद भी सेहतमंद बनी रहना चाहती हैं तो सबसे पहले तनाव यानी स्ट्रेस लेना छोड़ दें. यह होगा कैसे? हम हैं ना आपकी मदद के लिए. आइए प्रेग्नेंसी के दौरान स्ट्रेस फ्री होने के कुछ तरीक़ों के बारे में पढ़ते हैं.

आराम करें: ज़िंदगी में इससे रिलैक्सिंग टाइम कभी नहीं आनेवाला 

प्रेग्नेंसी के दौरान आम शहरी महिलाओं की सबसे बड़ी चिंता होती है,‘अब मेरे करियर का क्या होगा? अब तो करियर ट्रैक पर आने में कई साल लग जाएगा. मैंने अपनी ज़िंदगी का बहुमूल्य समय वेस्ट कर दिया. मैं करियर में काफ़ी आगे जा सकती थी.’ हम कहेंगे देखिए आपने लड़की होने के बावजूद, इस पुरुषप्रधान समाज में अपने दम पर एक बार अपनी जगह बना ली थी, तो दोबारा भी बना लेंगी. रही बात टाइम वेस्ट करने की तो मां बनना टाइम वेस्ट करना नहीं है. अब तो आप प्रेग्नेंट हैं ही तो क्यों यह सोच-सोचकर अपना दिमाग़ ख़राब करना कि ‘यूं होता, या यूं नहीं होता तो क्या होता’. अपने शरीर और दिमाग़ को शांत रखें. जीवन के इस बेमिसाल अनुभव का भरपूर आनंद लें. बिना किसी ग्लानि या चिंता के. सोचकर देखिए इससे रिलैक्सिंग टाइम कभी मिलनेवाला है? न तो आपको ऑफ़िस की डेडलाइन के लिए भागना-दौड़ना है और न ही आपको खाने-पीने को लेकर बहुत ज़्यादा सोचने की ज़रूरत है. तो बस एन्जॉय करें.

व्यायाम करें: पसीने के साथ-साथ तनाव को भी भगा दें
आपने सुना होगा, पढ़ा होगा व्यायाम तनाव को भगाने का एक जांचा-परखा तरीक़ा है. बिल्कुल सही पढ़ा है आपने. जब हम शारीरिक गतिविधि में व्यस्त होते हैं, तब हमारा शरीर तनाव से मुक्त होता है. पर प्रेग्नेंसी में आप हार्डकोर एक्सरसाइज़ तो कर नहीं सकतीं तो आपको अपने गायनाकोलॉजिस्ट की सलाह पर मैटेरनिटी योग, स्विमिंग और प्राणायाम जैसे व्यायाम को अपने रूटीन में शामिल करें. आपको दो बातें हमेशा याद रखनी है, प्रेग्नेंसी में सिर्फ़ और सिर्फ़ लाइट एक्सरसाइज़ ही कर सकती हैं और दूसरी बात-जो भी करना चाहती हैं अपने डॉक्टर से कंसल्ट ज़रूर करें. प्रेग्नेंसी के दौरान की जानेवाली कुछ एक्सरसाइज़ नॉर्मल डिलिवरी में आपकी मदद कर सकती हैं. ज़्यादातर गर्भवती महिलाएं यह सोच कर डरी रहती हैं कि क्या उनकी डिलवरी नॉर्मल होगी या सी-सेक्शन से होगी. तो जब आपका शरीर नॉर्मल डिलवरी के लिए तैयार होगा तब आप इस चिंता से काफ़ी हद तक बच जाएंगी.

करें धूप से दोस्ती: इससे तनाव वाला अंधेरा आपसे दूर भागेगा 

तनाव की तुलना हमेशा अंधेरे से की जाती है. अंधेरे को ख़त्म करने के लिए किसकी ज़रूरत होती है, यह बताने की ज़रूरत है क्या? तो अगर आपको तनाव ने घेर रखा हो और आपको अवसाद की ओर ले जा रहा हो तो आप धूप से दोस्ती कर लें. रोज़ाना सुबह के सूरज की आरोग्यवर्धक किरणों का सेवन करने के लिए धूप स्नान करें. अल-सुबह घर से बाहर निकलने से न केवल शरीर के लिए आवश्यक विटामिन डी की पूर्ति होती है, बल्कि ताज़ी हवा आपके मन को भी आनंद से भर देती है. प्रेग्नेंसी में विटामिन डी की कितनी अधिक ज़रूरत होती है, यह तो आपको आपकी डॉक्टर ने बता ही दिया होगा. रही बात स्ट्रेस को भगाने में धूप के महत्व की तो कई सारे रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जब हम सुबह की गुनगुनी धूप का आनंद लेते हैं, तब हमारा शरीर तनाव कम करनेवाला हार्मोन्स रिलीज़ करता है. हमारा मन शांत होता है और हम अच्छा महसूस करते हैं. तो आप भी रोज़ाना सुबह की धूप के लिए घर के बाहर निकलें, किसी गार्डन या शांत सड़क, समंदर किनारे (अगर आप तटीय क्षेत्र में रहती हों) पैदल भ्रमण पर जाएं.

रहें दोस्तों और डॉक्टर्स के टच में: इससे छटेंगे तनाव के बादल  

अगर यह आपका पहला बेबी होगा तो ज़ाहिर है, आपके लिए प्रेग्नेंसी पूरी तरह से एक नए अनुभव जैसी होगी. मूड स्विंग्स के चलते आप चिड़चिड़ाहट महसूस करेंगी, लोगों का चेहरा देखना तो छोड़िए उनकी आवाज़ सुनना भी आपको रास नहीं आएगा (बेशक, यह सब बहुत कम समय के लिए होगा, और पर्सन टू पर्सन अलग होगा). ऐसे में आपके पास सबसे आसान रास्ता होगा, ख़ुद को लोगों से काट लेना. पर जो आसान है, ज़रूरी नहीं कि सही भी हो. जब आप अकेली होंगी तब आपके मन में कई तरह के सवाल आएंगे और आपको उलझा देंगे. आप गूगल पर सवालों के जवाब तलाशने निकलेंगी तब आपका मन और उलझने लगेगा. आप और ज़्यादा तनावग्रस्त हो जाएंगी. इसलिए गूगल की बजाय अपने आसपास मौजूद लोगों पर भरोसा करें. अपने मन की उलझी हुई गांठें उनकी मदद से खोलें. अपने गायनाकोलॉजिस्ट, मां, सास, दोस्त, बहन आदि से बात करें. उनके अनुभव आपके बड़े काम आएंगे. आप काउंसिंग सेशन्स अटेंड कर सकती हैं, अलग-अलग सपोर्ट ग्रुप्स जॉइन कर सकती हैं. यह सब बताने का उद्देश्य यह है कि आप ख़ुद न तो अकेला समझें और न ही अकेलेपन को ख़ुद पर हावी होने दें.

जाएं बेबीमून पर: तरोताज़ा होकर लौटेंगी

वैसे तो बेबीमून का कॉन्सेप्ट अब उतना नया नहीं रहा, पर अभी भी बेबीमून पर जानेवालों की संख्या कम ही है. अगर आप प्रेग्नेंसी के दौरान लो फ़ील कर रही हैं तो अपने पति के साथ बेबीमून पर जा सकती हैं. आप दोनों लंबे समय से साथ में छुट्टियां बिताना चाहते थे. पर कभी आपके ऑफ़िस से छुट्टी नहीं मिल रही थी तो कभी पति के टाइम की समस्या हो जाती थी. प्रेग्नेंसी के इस समय का इस्तेमाल आप साथ बिताने के लिए करें. आप दोनों डॉक्टर की सलाह पर घर से दूर या नज़दीक के डेस्टिनेशन पर बेबीमून पर जा सकते हैं. आमतौर पर पहले ट्रायमिस्टर (प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीने) में यात्रा नहीं करने की सलाह दी जाती है. आप दूसरे ट्रायमिस्टर या तीसरे ट्रायमिस्टर में अपने गायनाकोलॉजिस्ट की सलाह पर बेबीमून प्लान कर सकती हैं. बहरहाल अभी तो लॉकडाउन का माहौल है, पर जब सबकुछ सामान्य होगा तब तो आप बाहर जा ही सकती हैं.

अगर लॉकडाउन के चलते आप बेबीमून पर नहीं भी जा सकीं तो अपना मीटाइम ज़रूर निकालें. हर वह काम करें, जो आपको पसंद हो. हर वह चीज़ खाएं, जिसका ज़ायका वज़न बढ़ने के डर से नहीं चख रही थीं. अपनी डायरी लिखें, अपने अनुभवों को ज़िंदगीभर के लिए संजोकर रखें. ऐसा करने से आपकी प्रेग्नेंसी के नौ महीने कब बीत जाएंगे, आपको पता भी नहीं चलेगा.