क्या थोड़ा-सा इंतज़ार है सही?
December 16th, 2020 | Post by :- | 77 Views

आप उससे पिछले सप्ताह एक दोस्त के घर आयोजित पार्टी में मिली ‍थीं. वो ऐसा युवक है, जिसे आप और आपके परिजन दोनों ही पसंद कर सकते हैं. वो आपसे दोबारा ‌मिलने को उत्सुक भी है. तो क्यों ना एक ऐसी डेट तय की जाए, जिसका अंत उसके घर पर हो? सही लगता है, है ना? पर ये बिल्कुल सही नहीं है. अमेरिका की कॉरनेल यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के अनुसार यदि आप अपने संभावित साथी के साथ सेक्शुअल संबंध बनाने के लिए थोड़ा इंतज़ार करें तो ये रिश्ता आगे जाकर ज़्यादा संतुष्टदायक रहेगा. “ये बेतुकी बात है,” कहती हैं रिद्धि मेहता, जो मुंबई की एक स्टॉक ब्रोकिंग फ़र्म में काम करती हैं. “बल्कि इसका उल्टा सही है.

हम जितनी जल्दी सेक्शुअल संबंध बनाएंगे, उतनी ही जल्दी ये जान पाएंगे कि साथ जीवन गुज़ार सकते हैं या नहीं. तब क्या होगा, जब हमें ये एहसास हो कि हम दोनों सेक्शुअल संबंधों में एक-दूसरे को संतुष्ट नहीं कर पाते? तब तो इस रिश्ते से बाहर निकलना और भी मुश्क़िल होगा, क्योंकि हम भावनात्मक रूप से जुड़ चुके होंगे.”

रिद्घि का तर्क अपनी जगह सही है, पर इस अध्ययन के नतीजों के अनुसार, कोर्टशिप के दौरान थोड़ा इंतज़ार करना या फिर धीरे-धीरे सेक्शुअल रिश्तों को अपनाना सही होता है-वे शादी से पहले के सेक्शुअल संबंधों का अध्ययन करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं. इस अध्ययन में 45 वर्ष से कम उम्र की 600 महिलाओं से प्रतिबद्घता, अंतरंगता, सेक्शुअल संतुष्टि, बातचीत और विवाद जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे गए. उनके जवाबों से निष्कर्ष निकाला गया कि रिश्ते के शुरुआती दौर में सेक्शुअल संबंधों का बनने से भविष्य में रिश्तों में एक-दूसरे की देखभाल व आपसी समझ की भावना नहीं आ पाती. यह अध्ययन सुझाव देता है कि कोर्टशिप का समय एक-दूसरे को जानने-समझने और रिश्तों के बारे में निर्णय लेने का होता है. “जब पार्टनर्स अपने आपसी तालमेल के बारे में, प्रतिबद्घता के बारे में जानकर भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं तब शारीरिक सामीप्य होना चाहिए.”

उन्हें अच्छी तरह जानें
सेक्स काउंसलर डॉ दवे कहते हैं कि इससे पहले कि कोई भी जोड़ा सेक्शुअल संबंध बनाने के बारे में सोचे, उसे इन तीन बातों पर ज़रूर ध्यान देना चाहिए: पहली-सेक्शुअल संबंध तब बनाएं, जबकि उन दोनों का स्वाभिमान उच्च स्तर पर हो. उनके भीतर ग्लानि और संकोच की भावना बिल्कुल न हो. दूसरी-दोनों एक-दूसरे पर पूरा भरोसा करते हों, ताकि वे शर्मिंदगी न महसूस करें. तीसरी-दोनों पार्टनर सेक्शुअल संबंधों के लिए शारीरिक रूप से सहज हों.

अमेरिका की ब्रिघम यूनिवर्सिटी में वर्ष 2010 में किया गया एक अध्ययन भी कॉरनेल यूनिवर्सिटी में किए गए अध्ययन से सहमत है. जो कहता है कि वे लोग, जिन्होंने सेक्शुअल संबंध बनाने में जल्दबाज़ी नहीं की उन्होंने बातचीत करना व उन विषयों पर चर्चा करना सीखा, जो बाद में उनके बीच समस्या की तरह आए. “मुझे लगता है कि आप किसी को जितना ज़्यादा जानते हैं, उतना ही बेहतर निर्णय ले सकते हैं- सेक्शुअल या फिर किसी दूसरे मुद्दे पर,” कहना है डॉ दवे का.

हालांकि रिद्घि अब भी सहमत नहीं हैं. “रिश्तों में सेक्स की अहम् भूमिका है,” वो कहती हैं. “ये कोई ऐसा मुद्दा नहीं है, जिसे बाद के लिए छोड़ा जा सके. सही निर्णय तो तभी लिया जा सकता है, जब आपके पास पूरी सूचना हो और इसमें उसका सेक्शुअल प्रदर्शन भी शामिल है.”

शादी से पूर्व सेक्शुअल गतिविधियां और युवा
वर्ष 2010 में इंटरनैशनल इंस्टट्यूट फ़ॉर पॉपुलेशन साइंसेज़, मुंबई और पॉपुलेशन काउंसिल, नई दिल्ली द्वारा कराए गए एक अध्ययन में पाया गया कि ग्रामीण युवा अपने समकक्ष शहरी युवाओं की तुलना में शादी से पूर्व सेक्शुअल गतिविधियों में ज़्यादा संलिप्त हैं. यह अध्ययन आंध्र प्रदेश, बिहार, राजस्थान, तमिलनाडु, झारखंड और महाराष्ट्र में कराया गया था.