हस्तमैथुन का हमारे दिमाग़ पर क्या होता है असर ?
August 22nd, 2020 | Post by :- | 295 Views

हस्तमैथुन सेक्शुअल नीड को सैटिस्फ़ाई करनेवाली सबसे बेसिक गतिविधि है. पर इसको लेकर हमारे दिमाग़ में बहुत सारी ग़लतफ़हमियां हैं. कोई इसे शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क के लिए भी उपयोगी बताता है तो कई बार हम इसके बुरे होने की बातें सुनते रहते हैं. इसलिए हमने यह पता लगाने की कोशिश की, आख़िर इसका हमारे दिमाग़ पर सही मायने में क्या असर होता है.
हस्तमैथुन वह क्रिया है, जिसके माध्यम से हम बिना पार्टनर के अपनी सेक्शुअल उत्तेजना को शांत करते हैं. विज्ञान की मानें तो इसका कोई नुक़सान नहीं है, पर मनोविज्ञान इसके फ़ायदे और नुक़सान दोनों गिना देता है. आइए विज्ञान और मनोविज्ञान की कसौटी पर इसे परखते हैं.

हस्तमैथुन के फ़ायदे: क्या कहता है विज्ञान?
हस्तमैथुन से शरीर कई हार्मोन्स को रिलीज़ करता है. इन हार्मोन्स से हमारे दिमाग़ में कई बदलाव आते हैं. जैसे हस्तमैथुन करने से ख़ुशियों के लिए ज़िम्मेदार हार्मोन डोपामाइन रिलीज़ होता है. इसीलिए कभी-कभी जब हम लो फ़ील कर रहे होते हैं तो हस्तमैथुन के बाद अच्छा महसूस करते हैं. हमारा फ़ोकस और कॉन्सन्ट्रेशन भी बढ़ जाता है. इसके अलावा इस प्रक्रिया के दौरान दर्द से नैचुरली राहत दिलानेवाले हार्मोन एन्डॉर्फ़िन का स्राव भी होता है. यह हार्मोन स्ट्रेस भगाने और मूड को बेहतर बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है.
ऑक्सीटॉसिन हार्मोन, जिसे लव हार्मोन के नाम से भी जाना जाता है, हस्तमैथुन का नैचुरल सहयोगी है. इससे आप वांछित महसूस करते हैं. यह स्ट्रेस घटाने के लिए भी जाना जाता है. यही कारण है कि हस्तमैथुन के बाद हम रिलैक्स्ड महसूस करते हैं. यह आपके ब्लड प्रेशर को कम करता है और स्ट्रेस बढ़ानेवाले हार्मोन कोर्टिसॉल के स्तर को भी. आप ख़ुद से प्यार जताने के बाद गहरी नींद में खो जाते हैं.
सेक्स के दौरान रिलीज़ होनेवाला टेस्टोस्टेरॉन भी हस्तमैथुन करते समय पर्याप्त मात्रा में रिलीज़ होता है. यह हमारे स्टैमिना और उत्तेजना को बढ़ाने में काफ़ी उपयोगी है. वहीं साथ में रिलीज़ होनेवाला हार्मोन प्रोलैक्टिन मूड को तो बेहतर करता ही है, इम्यूनिटी सिस्टम को भी मज़बूत करता है. इस प्रकार देखें तो हस्तमैथुन का हमारे मस्तिष्क पर सकारात्मक असर पड़ता है. इतना ही नहीं हमारे फ़िज़िकल हेल्थ के लिहाज़ से भी हस्तमैथुन अच्छा है. कई सेक्स थेरैपिस्ट रेग्युलर हस्तमैथुन करने की सलाह देते हैं. यहां तक कि शादीशुदा जोड़ों को भी.

हस्तमैथुन के हैं ये नकारात्मक प्रभाव
ऐसा नहीं है कि हर किसी पर हस्तमैथुन का सकारात्मक प्रभाव ही होता हो. भले ही इसके कुछ प्रमाणित फ़ायदे हैं, पर कुछ लोग हस्तमैथुन के बाद नकारात्मक भावना से भर जाते हैं. ऐसा इसलिए हो सकता है, क्योंकि आपके दिमाग़ में शुरू से ही यह बात भरी गई है कि हस्तमैथुन करना बुरी बात है. यह अच्छे लड़कों और लड़कियों के लिए नहीं है.
कुछ लोग बचपन से दिमाग़ में भरी गई इन बातों के अलावा धार्मिक और सामाजिक कारणों के चलते इस नैचुरल प्रक्रिया को निहायत ग़लत समझते हैं. कई जगहों पर यह मान्यता है कि महिलाओं को हस्तमैथुन नहीं करना चाहिए. यह एक अनैतिक कृत्य है. नीम हमीक़ों के पर्चे और प्रचार में हस्तमैथुन के साइड इफ़ेक्ट्स के बारे में पढ़-पढ़कर कई लोग इससे डरने लगते हैं. वे ऐसा करके शर्म, गिल्ट और ग्लानि से भर जाते हैं

ये कंडिशन्स भी हस्तमैथुन का आनंद लेने से दूर करते हैं
ऊपर बताई गई मानसिक कंडिशनिंग के अलावा कुछ शारीरिक कंडिशन्स भी हस्तमैथुन से दूरी बनाने के लिए मजूबर करते हैं. उदाहरण के लिए अगर पुरुष उत्तेजना की कमी से जूझ रहे होते हैं तो उन्हें यह प्रक्रिया बकवास लग सकती है. जिन लोगों में कामोत्तेजना की कमी होती है, वे भी इसे अपनाने की ज़रूरत महसूस नहीं करते और अंतत: इसे बुरा ही मानते हैं. जिन महिलाओं को वेजाइनल ड्रायनेस की समस्या होती है, वे भी इस प्रक्रिया में आनंद का अनुभव नहीं करते और इसे बुरा मानते हैं. इसके अलावा जननांगों से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी हस्तमैथुन से आपको दूर कर सकती हैं. वहीं वे लोग जो ज़िंदगी में कभी सेक्शुअल उत्पीड़न या हिंसा का शिकार हो जाते हैं, वे भी हस्तमैथुन क्या नॉर्मल सेक्स करने से भी कतराते हैं.

तो आप क्या समझें हस्तमैथुन को, अच्छा या बुरा?
देखा जाए तो सेक्स की उत्तेजना को बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के शांत करने का यह सबसे सुरक्षित ज़रिया है. अगर आप कंफ़र्टेबल हैं तो सेक्शुअल आनंद लेने के इस तरीक़े को अपनाने में कोई हानि नहीं है. पर किसी भी चीज़ की लत लग जाना बहुत ही ख़राब होता है. यदि आप हस्तमैथुन के दौरान उत्तेजना बढ़ाने के लिए पॉर्न देखते हैं और पॉर्न देखने को अपनी आदत बना लिया है तो यह आपके दिमाग़ी सेहत के लिए बहुत ही ख़राब है. आपको एक बात याद रखनी होगी, हस्तमैथुन एक तरीक़ा है. पर सेक्स का मतलब हस्तमैथुन ही नहीं होता. तो इसे अपनाना है या नहीं, यह पूरी तरह से आपके हाथ में है. अगर आपको पसंद हो तो संयमित मात्रा में करें और अगर नापसंद हो या आप इसके बिना भी ख़ुश हों तो किसी के प्रेशर में आकर आज़माने की क़त्तई ज़रूरत नहीं है.