रिश्ते में आई दरार की मरम्मत की जानी चाहिए या नहीं ?
August 22nd, 2020 | Post by :- | 151 Views

एक ऐसा रिश्ता, जो ख़त्म होने की कगार पर है, उसे जल्द से जल्द ख़त्म करने में ही भलाई है. हम उन लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जो आपकी पीड़ा को बढ़ा सकते हैं.
सदियों से यही कहा जाता है कि रिश्तों को निभाओ. ये सच है कि रिश्तों को रोज़ाना भावनाओं से सींचते रहना होता है, पर सभी रिश्ते इतनी मेहनत के लायक हों, ये ज़रूरी तो नहीं. ऐसे रिश्तों से जुड़े संकेतों को समझना बहुत ज़रूरी है, जो आगे बढ़ ही नहीं पा रहे हैं. “आकर्षण ने हमारे बीच की आग को जलाए रखा, लेकिन साल गुज़रते-गुज़रते हम एक-दूसरे में केवल ग़लतियां निकालने लगे,” बताती हैं, ट्रैवल कंसल्टेंट रक्षा मनैर, जो फ़िलहाल राहत महसूस कर रही हैं कि उन्होंने दो वर्ष लंबे चले उस रिश्ते को अलविदा कह दिया. “हम जानबूझकर एक-दूसरे की ग़लतियां नहीं निकालते थे, पर हमारे बीच पर्याप्त मानसिक और भावनात्मक अनुरूपता नहीं थी, जो हमें बांधे रखती. जब हम मिलते थे केवल बहस करते थे-छोटी-छोटी आदतों से लेकर जीवनशैली की प्राथमिकताओं तक, सभी पर. इतना कि मैं अपने काम पर ध्यान ही नहीं दे पाती थी, फिर भी मैं सोचती थी कि हमारा रिश्ता थोड़ा ज़्यादा संवेदनशील है.” हालांकि रक्षा और उनके पूर्व बॉयफ्रेंड ने कुछ नियम भी बनाए, ताकि उनका रिश्ता आगे बढ़ सके. पर उन्हें जल्द ही पता चल गया कि वे एक-दूसरे से जिस तरह के समझौते चाहते थे, वे दरअस्ल उनपर अमल नहीं करना चाहते थे. “जीवन में हम सभी की कुछ ज़रूरतें और कुछ लक्ष्य ऐसे होते हैं, जिनके साथ समझौता नहीं किया जा सकता. यदि कोई रिश्ता इस लक्ष्य को डिगाने लगे तो समझिए कि सही समय आ गया है यह सोचने का कि क्या आप इस रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहते हैं?”

उफ़ ये आलस
हर ख़ुशहाल रिश्ता कंफ़र्ट ज़ोन में आ जाता है और समय के साथ ये जाना-पहचाना पैटर्न बन जाता है, जिसमें रोमांच कम होता जाता है. रिलेशनशिप काउंसर सादिया सईद रावल उदासीनता के कारणों को यूं समझाती हैं,”ख़ुद के लिए निजी समय की चाहत रखना स्वस्‍थ चुनाव है, लेकिन एक-दूसरे के साथ समय न बिताना और एक-दूसरे के बिना ख़ुश रहना, मुसीबत का स्पष्ट संकेत है. बहुत से कपल्स की आपस में दिलचस्पी कम हो जाती है और इनका ये दिशाहीन रिश्ता सालों-साल चलता रहता है, क्योंकि वे इससे बाहर निकलने में आलस महसूस करते हैं. वे अनिश्चय की स्थिति में होते हैं, जहां उन्हें लगता है रिश्ते को ख़त्‍म करना भी उतना ही मुश्क़िल है, जितना इसे बनाए रखना.”

मीठा विश्वासघात
कई महिलाओं की आदत है शुतुरमुर्ग की तरह सिर को ज़मीन में घुसाए रखना. सोनाली उपाध्याय ने अपने बॉयफ्रेंड की बेवफ़ाई को केवल तभी स्वीकारा, जब उसने ख़ुद ये माना कि वो विश्वासघात कर रहा है. “सारे संकेत मौजूद थे, जब उसे लगता था कि मैं सो चुकी हूं, वो वॉट्सऐप पर चैट करने में व्यस्त हो जाता था. मैं उसके क़रीब जाती, वो बहाने से मुझसे दूर हो जाता था. मैं इन चीज़ों को नज़रअंदाज़ करती रही, ये सोचकर‌ कि आगे सब ठीक हो जाएगा.” यदि केवल आप ही रिश्ते को निभाने के लिए सारी मेहनत कर रही हैं तो ये रिश्ता आपके आत्मसम्मान पर गहरी चोट करनेवाला साबित हो सकता है. अपनी किताब सिंगल वुमनः लाइफ़, लव ऐंड अ डैश ऑफ़ सैस में रिलेशनशिप एक्सपर्ट मैंडी हेल इस सच्चाई की ओर इशारा करती हैं: “हम वाक़ई क्या चाहते हैं बनाम हम किस चीज़ के लिए सेटल होने तैयार हैं, इस बात को समझने का एक मौक़ा है ब्रेकअप. जीवन और प्यार में चीज़ों को सेटल करने की सोच से ऊपर उठिए. और अगली बार जब कोई आपसे ये कहे कि आपका स्टैंडर्ड बहुत ऊंचा है तो माफ़ी मत मांगिए. क्योंकि ये स्टैंडर्ड ही ये बात तय करता है कि हमें कैसा जीवन मिलेगा.