डर को कहें अलविदा …
August 24th, 2020 | Post by :- | 180 Views

ख़तरा बहुत वास्तविक चीज़ है, पर डर एक चुनाव है-एक ऐसा चुनाव, जो हम सब अपने जीवन में कभी न कभी करते हैं. अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आध्यात्मिक शिक्षक व शांति दूत डॉ कूमी वीवेन कहते हैं,‘‘डर, सभी जीवित लोगों की बुनियादी प्रतिक्रिया है, इसका कोई अपवाद नहीं है. हम ‘सबसे बुरी संभावनाओं’ के बारे में भरोसा करते हैं इसलिए हम भविष्य के बार में भयभीत रहते हैं. हम बदलाव से भी डरते हैं और अपने कंफ़र्ट ज़ोन में रहना चाहते हैं.’’ सबसे अच्छी बात-डर स्थायी नहीं होता और आप कुछ छोटे-छोटे क़दम उठाकर इससे लड़ सकते हैं.

‘डर’ को महसूस करना सीखें
जब भी डर लगे तो महसूस करें, क्योंकि हम इसे भगा सकते हैं. हमारा दिमाग़ स्थितियों को उससे भी ख़राब तरीक़े से व्याख्या करता है, जितनी कि वे हैं. इससे उबरने के लिए ‘सबसे बुरी संभावनाओं’ का अपने पक्ष में इस्तेमाल करें और इससे उबरने के बारे में सोचें. डॉ वीवेन कहते हैं,‘‘हम अनजानी चीज़ों से डरते हैं, क्योंकि हमें अपनी क्षमताओं पर पूरा भरोसा नहीं होता. डर का भरोसे के साथ सामना करना बहुत महत्वपूर्ण है. इसके प्रति कुछ क़दम उठाना और भी महत्वपूर्ण है.’’

लक्ष्य दोबारा निर्धारित करें
ऑफ़िस में, सालभर के लक्ष्य एक साथ निर्धारित कर, फिर उन्हें प्राप्त न कर पाने से बेहतर है आप शॉर्ट टर्म लक्ष्य निर्धारित करें और अपने उद्देश्यों को दोबारा तय करें. अपने लक्ष्य को थोड़ा बड़ा बनाएं और कुछ नया सीखने को भी इसमें शामिल कर लें और इससे आप तकनीकी रूप से कभी असफल नहीं होंगी, क्योंकि कुछ न कुछ नया सीखने को होगा ही. स्ट्रेस मैनेजमेंट में दक्ष मॉटिवेशनल स्पीकर डॉ राधाकृष्णन पिल्लई कहते हैं,‘‘साइकोलॉजिस्ट ने तक़रीबन १०० तरह के डरों का पता लगाया है, लेकिन अधिकतर लोगों में असफलता का डर व्याप्त होता है, ख़ासतौर पर कामकाजी प्रोफ़ेशनल्स में.’’

मदद मांगें
हममें से अधिकतर लोग सोचते हैं कि यदि हमने मदद मांगी तो हम कम योग्य नज़र आएंगे, पर हम भूल जाते हैं कि जब हम किसी से मदद मांगते हैं तो हम उसे उनकी कुशलता के लिए सम्मान देते हैं. ‘‘भरोसे के योग्य किसी व्यक्ति से अपने डर पर चर्चा करें. विशेषज्ञ आपको बताते हैं कि आप इस डर से कैसे उबरें. इससे आपको कम नहीं आंका जाएगा,’’ डॉ पिल्लई सलाह देते हैं.

डर को यूं जीत लें
उस स्थिति के बारे में सोचें, जिससे आप डरते हैं. खुद को रास्ते के उस अवरोध में अटकता देखें, महसूस करें. ख़ुद को डरता हुआ महसूस करने दें. कुछ मिनटों तक ये सोचें कि आपको इस अवरोध से कैसे उबरना चाहिए. अवरोधों के बावजूद ख़ुद को इससे सफलतापूर्वक उबरता हुआ सोचें.