दोस्ती की उम्र बढ़ाने के प्रैक्टिकल नुस्ख़े …
August 24th, 2020 | Post by :- | 136 Views

दोस्ती जीवन का एक ख़ूबसूरत एहसास है. “रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय, टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ परि जाय.” रहीम के इस दोहे को हमारे समाज ने ठीक से समझा नहीं है. क्योंकि दोस्ती या किसी अन्य संबंध में ग़लतफ़हमियां या भूल होती रहती हैं. इंसान जाने-अनजाने में अपने मित्र को किसी न किसी प्रकार से चोट भी पहुंचाता रहता है. पर इसका मतलब यह नहीं होता कि दोस्ती टूट गई. जैसे ही हम अपनी ग़लती का एहसास करते हुए माफ़ी मांग लेते हैं, वह धागा जिसे हम टूटता हुआ महसूस कर रहे हैं और मज़बूत हो उठता है. चर्चित रिलेशनशिप काउंसलर रशिका प्रीति कहती हैं,“हर संबंध की तरह दोस्ती में भी उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, यहां भी रूठना मनाना लगा रहता है, पर अगर दोनों तरफ़ से मैच्योर दोस्ती है तो भले ही आज नाराज़गी दिख रही है, पर समय के साथ यह ठीक हो ही जाएगी.”

क्यों आती है दोस्ती में दरार?
लड़कियों की दोस्ती में सबसे ज़्यादा नुक़सान ईर्ष्या से होता है. लड़कियों के बीच कॉम्पटिशन भी होता है. कभी आपको फ़ील हो कि आपकी सहेली आपके किसी बात से ईर्ष्या महसूस कर रही है तो आपको उसके सामने उन बातों को करने से बचना चाहिए. ईर्ष्या से सिर्फ़ हेल्दी कम्यूनिकेशन ही बचा सकता है. यह तो सभी जानते हैं लड़कियों में अटेंशन की चाह बहुत होती है, ऐसे में जब आपकी सहेली आपसे नाराज़ हो तो आप उसे ज़्यादा अटेंशन दें, उसकी हर बात को ध्यान से सुनें. अपनी सहेली से हर महत्वपूर्ण बात शेयर करें, इससे दोस्ती मज़बूत होती है. वहीं आमतौर पर एक लड़का-लड़की की दोस्ती बहुत मज़बूत होती है. यह तभी टूटती है, जब इनमें से किसी के मन में फ़ीलिंग डेवलप हो जाती है. इससे बचने के लिए साफ़-साफ़ बात करनी चाहिए, ताकि दोस्ती बची रह सके. रही बात दो लड़कों की दोस्ती के बीच दरार आने की तो इसकी सबसे बड़ी वजह है ईगो का टकराव. कई बार किसी बात को लेकर दो क़रीबी लोगों के विचार बिल्कुल अलग-अलग होते हैं. ऐसे में एक स्थान पर आकर दोनों में मनमुटाव होने की आशंका बनी रहती है. लड़के ज़्यादातर एक दूसरे से जलते नहीं हैं. दोस्ती की बीच ईगो बड़ी समस्या है, अगर यह आ गया तो दोस्ती में मनमुटाव बढ़ जाता है. जैसे दो दोस्तों में एक ने तरक़्क़ी कर ली तो उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी हाल में दूसरे दोस्त को नीचा न दिखाए. अगर दोस्त के मन में हीन भावना जाग गई तो आपकी दोस्ती ख़तरे में पड़ सकती है.

संवाद से सुलझाएं विवाद
रशिका प्रीति बताती हैं,“जब दो लोगों की दोस्ती ख़राब होती है तो मैं लोगों के बीच कम्यूनिकेशन पर ज़ोर देती हूं. यह कम्यूनिकेशन ऐसा होना चाहिए कि जो दोस्त नाराज़ है, उसकी हर बात बिना किसी शर्त के स्वीकार की जाए. अगर आपको अपनी दोस्ती बचानी है तो आपको अपने दोस्त के ग़ुस्से को ठंडा होने तक का इंतज़ार करना चाहिए. हो सकता है कि आपको लग रहा हो कि आप सही हैं, पर अभी यह सही समय नहीं है अपनी बात को मनवाने का. कई बार दो लोग एक साथ नहीं आना चाहते तो ऐसे में हम इंटरपर्सनल कम्यूनिकेशन पर काम करते हैं. इस तरीक़े में एक व्यक्ति पहले अपनी बात कहता है, फिर वही व्यक्ति सामने वाले के नज़रिए से अपनी हर बात का जवाब देता है. वह उसकी बात का ठीक वैसे ही जवाब दे जैसे नाराज़ मित्र देता. हमने देखा ऐसा करने से ज़्यादातर लोगों को राहत मिलती है.”

मिल-जुलकर बढ़ाएं दोस्ती
नीतिवचन कहते हैं कि एक सच्चा मित्र ख़ून के रिश्ते से भी बढ़कर होता है. यह बात सही भी है, हम सब चाहते हैं कि हमारा भी ऐसा दोस्त हो, जो हमारे सबसे क़रीब हो, लेकिन इस इच्छा की जांच इस कसौटी पर की जानी चाहिए कि क्या आप स्वयं किसी के लिए ऐसा दोस्त साबित हो सकते हैं? सच्चे दोस्त सिर्फ़ हाल-चाल जानने की फ़ॉर्मैलिटी पूरी करने के लिए ही बातचीत नहीं करते. वे सच में आपकी परवाह करते हैं, इसीलिए आपकी ग़लतियों के लिए उनके पास सब्र होता है, माफ़ी होती है और आपकी तक़लीफ़ों के लिए हमदर्दी होती है. यही वे चीज़ें हैं, जिनसे दोस्ती का रंग निखरता है.
अब लोग एक-दूसरे से मिलकर बातचीत करने से परहेज़ करने लगे हैं. उनको लगने लगा है कि मोबाइल-कम्प्यूटर के सामने बैठकर हम जुड़ रहे हैं, लेकिन इस जुड़ाव में कहीं न कहीं उस ऊष्मा की कमी रह जाती है, जो आमने सामने बैठकर बात करने और कई बार दोस्त के सामने बिना बोले ही उसके सुन लेने में होती है. आमने-सामने बात करने में जो आनंद है, वह सोशल मीडिया वाली दोस्ती में नहीं मिल सकता. मिलकर बैठने, बातचीत करने पर दोस्त को देखना, उसके हाव-भाव को पढ़ना आभासी माध्यमों से कहां संभव है? इसीलिए आज के दौर की मित्रता को सबसे बड़ी ज़रूरत है-रूबरू होने के लिए वक़्त तलाशने की.

लंबी दोस्ती के कारगर मंत्र
हमें अपने दोस्त के बारे में पूरी जानकारी रखनी चाहिए. माफ़ी मांगना सबसे कारगर तरीक़ा है. बड़ी-से-बड़ी ग़लती करने के बाद भी जब आप अपने मित्र से साफ़ दिल से माफ़ी मांगते हैं तो वह आपको माफ़ कर देती/देता है. हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि अब जब माफ़ी मांगने से हमारा दोस्त हमें वापस मिल रहा है तो दोबारा वह ग़लती किसी भी क़ीमत पर न दोहराएं. खुले दिल से अपने मित्र को यह बताना चाहिए कि मैं फिर से ऐसी ग़लती नहीं करूंगा. कई बार माफ़ी मांगने पर भी यदि दोस्त मान न रहा हो, तो भी आपको उसका साथ नहीं छोड़ना चाहिए.

* क्लीयर कम्यूनिकेशन करें. हर बात को साफ़ तरीक़े से करें. जैसे कोई बात पसंद नहीं आ रही है तो उससे नाराज़ होकर चुप रहने की बजाए उसे बताएं कि यह ठीक नहीं है.
* कई बार हम दोस्ती में कुछ ग़लतियां कर बैठते हैं. हम दोस्तों को समझने में ग़लती कर देते हैं. ऐसा शायद इसलिए होता है, क्योंकि दोस्ती में विश्वास डगमगा जाता है. ख़ुद को बेहतर और अच्छा दिखाने, और दोस्त को नीचा दिखाने से दोस्ती टूट जाती है.
* याद रखें घमंड से किसी भी रिश्ते की बुनियाद हिल सकती है. दोस्ती में अगर एक दूसरे के प्रति प्रतियोगिता की भावना हो, तो वह भी ख़तरनाक है.
* दोस्तों के विश्वास को न तोड़ें. वे बातें जो उन्होंने केवल आपसे शेयर की हैं, उन्हें इधर-उधर न फैलाएं.
* दोस्ती से लालच को कोसों दूर रखें. मतलबी दोस्ती से बेहतर है दोस्ती न होना. मतलबपरस्ती कभी भी अच्छी नहीं होती.
* कभी पुरानी चीज़ें दोहराएं. दोस्त को एक प्यारी-सी चिट्ठी लिखें. ये मत कहें कि आज चिट्ठी लिखना बीते कल की बात है. जब आप अपनी व्यस्तता में से वक़्त निकालकर दोस्त के लिए खत लिखते हैं, तो उन्हें बहुत ख़ुशी मिलती है. पुराने दिन याद हो आते हैं. वे इस बात के मुरीद हो जाते हैं कि आपने व्यस्तता के बावजूद उनके लिए इतना सोचा.