बातें, जो आपको कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के बारे में मालूम होनी ही चाहिए
September 8th, 2020 | Post by :- | 205 Views

सावधानी हटी, दुर्घटना घटी-रास्ते चाहे ज़िंदगी के हों या सड़क के, ये बात दोनों पर ही लागू होती है. अब कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स को ही ले लीजिए, अनचाहे गर्भ से छुटकारा दिलाने में मददगार ये पिल्स इस विषय में बेहद अहम रोल निभाती हैं, लेकिन अगर इनसे जुड़ी जानकारियों और सावधानियों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाए तो यही किसी बड़ी समस्या की वजह तक बन सकती हैं. इनके इस्तेमाल से पहले इनसे जुड़ी मुख्य बातों को जानना यह फ़ैसला लेने में मददगार साबित होगा कि आपकी हेल्थ, लाइफ़स्टाइल और पर्सनल व फ़ैमिली प्रायॉरिटी के हिसाब से किस तरह की कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स आपके लिए सही होंगी.

कंडोम बनाम कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स, क्या है बेहतर?
वैसे तो एक्स्पर्ट्स का ज़ोर हमेशा इस बात पर रहता है कि यौन संबंधों के दौरान मेल पार्टनर, यानी पुरुष साथी के द्वारा कंडोम का प्रयोग ही सबसे अच्छा रहता है, क्योंकि इससे न केवल अनचाहे गर्भधारण से बचा जा सकता है, बल्कि किसी भी तरह के इंफ़ेक्शन जैसे एचआईवी या यौन रोगों से बचाव संभव है. यहां समस्या यह है कि अधिकांश पुरुष कंडोम को अपने सेक्शुअल प्लेज़र में बाधा मान लेते हैं. उन्हें लगता है कि इसके उपयोग के बाद बनाए संबंध में पूरा आनंद नहीं मिलता. इसलिए ज़्यादातर पुरुष इस मामले में या तो आना-कानी करते हैं या फिर लापरवाह हो जाते हैं. उनका ज़ोर इस बात पर ही ज़्यादा रहता है कि उनकी फ़ीमेल पार्टनर ही पिल्स ले लें. वैसे ये भी पाया गया है कि ऐसी महिलाओं की भी बड़ी संख्या है, जो कंडोम को अपने आनंद के चरम में बाधा मानती हैं और उन्हें इसके बग़ैर फ़िज़िकल रिलेशन बनाना ज़्यादा उत्तेजित करता है.
जिस तरह से फ़िज़िकली इंटीमेट होते हुए कंडोम यूज़ करने के ढेरों फ़ायदे हैं, वहीं कंडोम फ़ेलियर, यानी यूज़ के दौरान कंडोम फटने के केसेज़ भी बड़ी संख्या में सामने आते हैं, जो महिलाओं द्वारा इन पिल्स को लेने की वजह बन जाते हैं. डॉ अनीता कांत, एचओडी ओबीएस ऐंड गायनाकोलॉजिस्ट, एशियन हॉस्पिटल, फ़रीदाबाद के मुताबिक़, कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स तीन तरह के होते हैं-प्रोजेस्टिन इसीपी कॉम्बिनेशन पिल्स, जिनमें सिर्फ़ प्रोजेस्टिन ही होता है. दूसरा, इन इसीपी में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन दोनों का कॉम्बिनेशन मिलता है. तीसरी तरह की पिल्स होती हैं, ऐंटीप्रोजेस्टिन पिल्स. इन तीनों ही तरह की पिल्स की अनचाहा गर्भ रोकने में अपनी-अपनी भूमिका होती है. इनसे जुड़े लाभ या दूसरे पहलू इस बात पर निर्भर करते हैं कि आप इनमें से किसे चुनती हैं.

कितनी सुरक्षित हैं गर्भनिरोधक गोलियां?
ये ओरल पिल्स बेहतर गर्भनिरोधक होती हैं, जो अपने उपयोग के सही तरीक़ों के साथ किसी भी प्रकार के अनचाहे गर्भ को 99 प्रतिशत तक रोक सकती हैं. इनमें सिर्फ़ एक प्रतिशत महिलाएं ही ऐसी हैं, जिन्हें इनके प्रयोग के बाद भी गर्भधारण का सामना करना पड़ा. यह महिलाओं के लिए एक बहुत बड़े राहत की बात है, क्योंकि सोच-समझ कर प्लैन की गई प्रेग्नेंसी से जहां मातृत्व का एहसास जुड़ा होता है, वहीं अनचाहा गर्भ किसी भी महिला की ज़िंदगी में ढेर सारी चिंताएं भर देता है.
इन तमाम बातों के बावजूद कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का इस्तेमाल बहुत सावधानी की मांग करता है, क्योंकि देखकर तो मक्खी नहीं निगली जाती, ये तो पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली पिल्स है, जिनका सीधा असर आपकी अपनी सेहत पर पड़ेगा. डॉ कांत का कहना है,“बाज़ार में यूं तो कई तरह की कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स उपलब्ध हैं, लेकिन आपके लिए क्या सही होगा, ये फ़ैसला अपनी गायनोकोलॉजिस्ट से मिली सलाह के आधार पर ही लें. सही सलाह के लिए सबसे ज़रूरी बात ये है कि आप डॉक्टर को अपनी हेल्थ, लाइफ़स्टाइल, अपनी सभी छोटी-बड़ी बीमारियों के अलावा अपनी फ़ैमिली से जुड़ी मेडिकल केस हिस्ट्री जैसे डायबिटीज़, हार्ट डिज़ीज़, किडनी प्रॉब्लम, कैंसर वगैरह, इस समय अपने द्वारा ली जा रही दूसरी दवाओं और अपनी प्राथमिकता से जुड़ी तमाम जानकारियां सही-सही दें और इसके आधार पर सुझाई गई पिल्स का ही इस्तेमाल करें.” इस्तेमाल से जुड़ी तमाम सलाहों का पूरी तरह से पालन करें और पिल्स हमेशा सही समय पर लें, ताकि आप सही रिज़ल्ट पा सकें और किसी भी प्रकार के साइड इफ़ेक्ट से भी बची रहें. पिल्स लेने के रूटीन में अगर किसी भी तरह की असावधानी होती है या आप कोई तकलीफ़ महसूस करती हैं तो अपनी गायनाकोलॉजिस्ट से सलाह लेने में देर न करें.

क्या हैं छोटी-सी गोली के साइड इफ़ेक्ट्स?
वर्ष 1960 के दशक में इस्तेमाल की शुरुआत के बाद से ही अपने साइड इफ़ेक्ट्स के चलते कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स हमेशा सवालों के दायरे में रही हैं. इसलिए ज़रूरी है कि एक नज़र इनसे होने वाले साइड इफ़ेक्टस पर भी डाली जाए
* डिप्रेशन होना.
* मोटापा बढ़ना.
* स्तनों का कसाव घटकर उनका कोमल हो जाना.
* मितली या पेटदर्द की शिकायत होना.
* चक्कर आना या सिरदर्द होना.
* लगातार होने वाले मूड स्विंग्स.
* पीरियड्स का अनियमित होना या रुक जाना.
* सेक्शुअल डिज़ायर का घटना.
* वेजाइनल डिस्चार्ज, यानी योनि में स्राव होते रहना.
* विज़न में फ़र्क़ आना.
* अधिक इस्तेमाल होने पर कंसीव करने, यानी गर्भधारण की क्षमता का प्रभावित होना या बांझपन तक.
* इससे अबॉर्शन संभव नहीं है.
* ये यौन संबंधी रोगों या एचआईवी आदि से सुरक्षा नहीं देती है.

पुरुषों के लिए ये तीन तरह के कॉन्ट्रासेप्टिव्स चर्चा में हैं
कंडोम के अलावा पुरुषों के इन तीन कॉन्ट्रासेप्टिव तरीक़ों पर काफ़ी बात की जाती रही है.
1. टेस्टेस्टेरॉन और प्रोजेस्टिन युक्त जेल का नियमित इस्तेमाल.
2. पुरुषों के लिए बर्थ कंट्रोल पिल्स भी उपलब्ध हैं.
3. बिना सर्जरी के नसबंदी करना यानी पॉलिमर जेल द्वारा स्पर्म के प्रवाह को रोकना. ज़रूरत पड़ने पर इस जेल को पिघलाया भी जा सकता है.