पुरुष और महिलाएं दोनों में हो सकती है युरेथराइटिस की समस्या
September 8th, 2020 | Post by :- | 168 Views

युरेथराइटिस एक यौन समस्या है जिसमे युरेथ्रा(मूत्रनली) में सूजन और जलन की समस्या उत्पन्न होती है। पुरुषों में वीर्य भी इसी नली से बाहर आता है। जीवाणु(बैक्टीरिया) जनित इस रोग में बार-बार पेशाब आता है और पेशाब के समय जलन की अनुभूति होती है। यह समस्या यूरेनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की समस्या से भिन्न होती है। यूरेनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की अवस्था में यूरेनरी ट्रैक्ट में सूजन और जलन होता है वहीं युरेथराइटिस में युरेथ्रा मे जलन और सूजन की समस्या उत्पन्न होती है। इन दोनों समस्याओं में भले ही लक्षण सामान हों दोनों दो अलग अलग समस्याएं हैं और दोनों का इलाज एक दूसरे से भिन्न है। युरेथराइटिस की समस्या किसी भी उम्र के महिला और पुरुष में हो सकती है। पुरुषों के तुलना में महिलायें इस समस्या से ज्यादा पीड़ित होती हैं, क्योंकि पुरुषों में युरेथ्रा की लम्बाई महिलाओं के युरेथ्रा से ज्यादा लम्बी होती है। महिलाओं में युरेथ्रा की लम्बाई सामान्यतः डेढ़ इंच लम्बी होती है जिस वजह से बैक्टीरिया का प्रवेश आसानी से हो जाता है।

कारण:  युरेथराइटिस एक संक्रामक रोग है जो नीसेरिया गोनोरिये(Neisseria gonorrhoeae) क्लेमिडिया ट्रेकोमाटिस(Chlamydia trachomatis) और माइकोप्लाज्मा जेनाईटेलियम(Mycoplasma genitalium) नामक बैक्टीरिया से होता है। ये बैक्टीरिया गोनोरिया और क्लेमिडिया जैसे रोगों का भी कारक होता है।

युरेथराइटिस के लक्षण:

महिलाओं में युरेथराइटिस के निम्नलिखित लक्षण पाए जाते हैं:

  • पेशाब करने के दौरान जलन।
  • बार-बार पेशाब का आना।
  • पेशाब करने के दौरान परेशानी।
  • अस्वाभिक रूप से योनि से तरल पदार्थों का स्राव।

पुरुषों में युरेथराइटिस के लक्षण:

  • पेशाब करने के दौरान जलन।
  • लिंग के अगले सिरे में जलन और खुजली की समस्या।
  • वीर्य या पेशाब में खून का आना।
  • लिंग से पेशाब और वीर्य के अलावा अन्य तरल पदार्थों का स्राव।

युरेथराइटिस की जांच: 

युरेथराइटिस के निदान में डॉक्टर आपसे आपके लक्षणों के बारे में पूछेगा उसके बाद जननांगों से निकले तरल पदार्थों की जांच करेगा। इस जांच में रोग का पता चल जाता है।

युरेथराइटिस का उपचार: युरेथराइटिस का इलाज एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवाओं से किया जाता है। अगर युरेथराइटिस की समस्या किसी यौन संचारित रोग के संक्रमण से हो तो मरीज के साथ-साथ उसके पार्टनर का भी इलाज जरुरी होता है।

युरेथराइटिस से बचाव:

युरेथराइटिस के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया कई बार असुरक्षित यौन सम्बन्ध की वजह से भी फैलते हैं। ऐसी स्थिति में सुरक्षा के साथ यौन सम्बन्ध बनाना बहुत ही जरुरी हो जाता है। युरेथराइटिस से बचाव के लिए निम्नलिखित कदम उठाये जाने चाहिए:

  • एक से ज्यादा साथी के साथ यौन सम्बन्ध ना बनायें।
  • यौन संबंध बनाते वक्त कंडोम का इस्तेमाल करें।
  • नियमित रूप से अपनी जांच कराते रहें।
  • अगर आपको पता चल जाए की आप किसी यौन संचारित रोग से ग्रसित है तो दूसरों को भी अपनी समस्या बता कर आगाह करें।
  • ज्यादा पानी पियें और सम्भोग के बाद तुरंत पेशाब करें।

युरेथराइटिस से ख़तरा:

इलाज न होने पर युरेथराइटिस की समस्या आपके अंडकोष में सूजन और दर्द पैदा कर सकती हैं। इलाज न होने पर युरेथराइटिस की वजह से आपकी फर्टिलिटी भी जा सकती है और आप बांझपन के शिकार हो सकते हैं। इलाज न होने पर युरेथराइटिस का संक्रमण किडनी और यूरिनरी ट्रैक्ट को भी नकरात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। महिलाओं में इसका इलाज न होने पर पेल्विक इंफ्लेमेटरी रोग हो सकता है। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का ख़तरा भी युरेथराइटिस के इलाज न होने पर उत्पन्न हो सकता है। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी एक ऐसी अवस्था है जिसमें भ्रूण गर्भाशय की जगह गर्भाशय के बाहर विकसित होना शुरू होता है।