जानिये क्या है पुरुषों में होने वाली रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन की समस्या
September 8th, 2020 | Post by :- | 189 Views

रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन पुरुषों में होने वाली एक ऐसी यौन समस्या है, जिसमे वीर्य लिंग से बाहर निकलने के बजाय मूत्राशय(bladder) में चला जाता है। हालांकि, ऐसा होने के बावजूद भी चरमोत्कर्ष का अनुभव होता है। इस स्थिति में वीर्य या तो निकलता नहीं है या बहुत कम ही निकलता है। इस स्थिति को ड्राई ओर्गाज्म भी कहते हैं। दरअसल सामान्य स्थिति में चरमोत्कर्ष के दौरान पुरुषों में मूत्राशय का द्वार बंद हो जाता है, ताकि वीर्य मूत्राशय में ना जाकर मूत्रमार्ग के रास्ते बाहर निकल जाए। रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन की स्थिति में मूत्राशय का द्वार चोट या अन्य किसी कारण पूरी तरह से बंद नहीं हो पाता और वीर्य बाहर जाने की बजाय मूत्राशय में चला जाता है।

रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन क्या है: रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन हानिकारक नहीं है लेकिन ये पुरुषों में बांझपन की वजह बनता है। रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन की समस्या आम नहीं होती। बहुत ही कम मामलों में ही पुरुषों के साथ ये समस्या होती है। मूत्राशय में वीर्य की उपस्थिति भी हानिकारक नहीं होती है। रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन के उपचार की जरुरत बस पुरुषों में बांझपन की समस्या को दूर करने के लिए किया जाता है।

रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन के लक्षण: रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन की समस्या आपके लिंग में तनाव होने में बाधा नहीं डालती ना हीं ये आपको ओर्गाज्म का आनंद लेने से रोकती है। रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन की समस्या में निम्नलिखित लक्षण सामने आते हैं।

  • चेर्मोत्कर्ष (क्लाइमेक्स) के बाद वीर्य का न निकलना या बहुत कम निकलना।
  • बांझपन।
  • सम्भोग के बाद पेशाब का धुंधला होना।

रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन के कारण: रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन के पीछे निम्नलिखित वजहें होती हैं।

  • पुरस्थग्रंथि(प्रोस्टेट) या मूत्राशय की सर्जरी।
  • डायबिटीज(मधुमेह)
  • हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप)
  • मल्टीप्ल स्क्लेरोसिस
  • पेट, पेडू और जननांगों का ऑपरेशन

रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन की जांच:  पेशाब के नमूने की युरीएनालिसिस जांच द्वारा इस समस्या का पता किया जाता है। जांच में पेशाब में शुक्राणुओं की ज्यादा मात्रा रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन की समस्या को प्रमाणित करती है।

रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन का उपचार: अगर रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन की समस्या दवा के सेवन से उत्पन्न हुई है तो उस दवा का सेवन बंद कर देना या फिर दवा के असर को कम करने के लिए दूसरी दवा का सेवन इसके उपचारों में से एक है। डायबिटीज की वजह से हुए रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन का उपचार दवाओं के सहारे मुमकिन है। डॉक्टर रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन से ग्रसित व्यक्ति के बांझपन की समस्या के समाधान के लिए उनके पेशाब से शुक्राणु निकालकर इंट्रायुटेरिन, इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन जैसी तकनीको की मदद से उनके बांझपन का वैकल्पिक तरीका निकालते हैं।

रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन के उपचार के साइड इफेक्ट्स: रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन के उपचार में ली गयी दवाओं के सेवन से ह्रदय के धड़कनों के अनियमित रूप से धड़कने की बीमारी हो सकती है।

रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन के दीर्घकालिक प्रभाव(लॉन्गटर्म इफ़ेक्ट): लम्बे समय तक उपचार के बिना रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन की समस्या पुरुषों को बांझ बना सकती है।