सेक्स के ज्ञान के लिए ख़तरनाक साबित हो सकता है डॉ गूगल – Love Romance
September 20th, 2020 | Post by :- | 194 Views

तुषार साठे,* को लगा कि उन्हें क्लमिडिया जैसी बीमारी है. पर इस बीमारी का पता उन्हें न तो किसी चिकित्सकीय परीक्षण से चला और न ही किसी योग्य डॉक्टर के ज़रिए. तुषार ने इस बात का अनुमान और इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी और अपनी परेशानियों का घालमेल करके ख़ुद ही लगाया. उनकी इस हरकत ने उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया. सेक्शुअल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ राजन भोसले, मुंबई, बताते हैं,‘‘बहुत पूछने पर उन्होंने स्वीकारा कि ख़ुद को क्लमिडिया से पीड़ित समझने के बाद उन्होंने इसके इलाज के लिए ऐंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन किया था. वो ख़ुद के एसटीडी से पीड़ित होने के बारे में तो सही थे, लेकिन इलाज के लिए उन्होंने जो दवा ली, वो बिल्कुल ग़लत थी.’’

ऑनलाइन आकर्षण
अमेरिकी एफ़डीए ने ऐसे ऑनलाइन विज्ञापनों को रोकने के लिए ठोस क़दम उठाए हैं, जो हर तरह की एसटीडीज़ के सफल इलाज का दावा करते थे-हरपीस से लेकर गोनोरिआ तक. इन बातों से साफ़ है कि ये हमारी आदत में शामिल हो चुका है कि डॉक्टर के पास जाने के पहले भी हम गूगल सर्च कर ही लेते हैं. लोग तो ऐसे विज्ञापनों पर भी आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं, जिनकी हेडिंग ‘9 इंच प्लेज़र’ होती है. ‘‘भारत में एसटीडीज़ को गुप्त रोग कहते हैं. इसी से पता चलता है कि यहां लोग सेक्शुअल बीमारियों को किस नज़रिए से देखते हैं,’’ कहते हैं डॉ भोसले. ‘‘हिचकिचाहट इस बात की होती है कि हम डॉक्टर्स को बताना नहीं चाहते कि हम सेक्स संबंधी बीमारी से ग्रस्त हैं, क्योंकि क्या पता इसका संबंध हमारी सेक्शुअल आदतों से हो.’’ डर भी इसमें भूमिका निभाता है. बॉम्बे हॉस्पिटल की ऑब्सटेट्रिशियन व गायनाकोलॉजिस्ट डॉ संगीता अग्रवाल कहती हैं,‘‘बहुत से लोग इसलिए डॉक्टर्स से बात नहीं करते, क्योंकि उन्हें लगता है कि कहीं डॉक्टर्स उनके अभिभावकों तक न पहुंच जाएं या फिर कहीं यदि क्लीनिक में कोई जान-पहचान का व्यक्ति मिल गया तो?’’

परेशानी और भूल-भुलैय्या
एसटीडी के रोग का पता लगाना और इसका इलाज करना काफ़ी जटिल प्रक्रिया है. ‘‘तक़रीबन 30 तरह की एसटीडीज़ होती हैं,’’ यह बताते हुए डॉ भोसले कहते हैं,‘‘इनमें से आपको क्या हुआ है यह तय करना मुश्क़िल है.’’ इन बीमारियों का सही पता लगाने के लिए लैब और क्लीनिकल परीक्षण ज़रूरी होते हैं. डॉ अग्रवाल इस बात पर ज़ोर देती हैं कि सबसे ज़रूरी है इन बीमारियों का पूरा इलाज. यदि आप अपना इलाज करने में सफल हो जाती हैं तो भी इस बात का ध्यान रखें कि वह बीमारी आपके पार्टनर में अब भी मौजूद हो सकती है और इससे आपको दोबारा संक्रमण होने का ख़तरा बना रहता है. आपको ये दोबारा न हो, इसके लिए सावधानी बरतने और सुरक्षित सेक्स संबंध बनाने की जानकारी देने के लिए ज़रूरी है कि कोई प्रशिक्षित व्यक्ति आपको सलाह दे, ये बातें ऑनलाइन संभव नहीं हैं.

कब जाएं डॉक्टर के पास
* यदि वेजाइना से दुर्गंधयुक्त पीले या हरे रंग का स्राव हो, सेक्शुअल संबंधों के दौरान या उसके बाद हर बार रक्तस्राव हो, सेक्शुअल संबंधों के बाद दर्द हो, पेशाब के दौरान या बाद आपके जननांगों के आसपास खुजली या जलन हो; जननांगों के आसपास फोड़े-फुंसी या गांठ महसूस हो या फिर अंडरवेयर में काला पाउडर जैसा पदार्थ या सफ़ेद डॉट्स नज़र आएं.
* ज़रूरी नहीं कि इस तरह के लक्षण स्पष्ट रूप से नज़र आ ही जाएं. यदि आपने किसी नए साथी के साथ असुरक्षित सेक्शुअल संबंध बनाए हैं या आपके साथी ने किसी अन्य के साथ असुरक्षित संबंध बनाए हैं या फिर आपके साथी में एसटीडीज़ के कोई लक्षण नज़र आएं तो डॉक्टर से संपर्क करें.
*आग्रह पर नाम बदला गया है.