5 बातें, जो रिश्ते पर लगा सकती हैं पूर्ण विराम – Love Romance
September 20th, 2020 | Post by :- | 147 Views

रिश्ते जब लंबी दूरी का सफ़र तय करने की ओर बढ़ते हैं तब ज़रूरी नहीं कि आगे की राह उतनी ही सपाट और समतल हो कि ज़िंदगी हंसते-हंसते बीत जाए. याद रखें, राहें आसान नहीं होतीं, बनानी होती हैं. आपकी आगे की राह आसान कैसे बनेगी उसका फ़ैसला आपके हाथ में है, क्योंकि सबकी लाइफ़ अलग-अलग है. पर हां, आपकी राह और ऊबड़-खाबड़ न बने इसके लिए इन 5 बातों का ख़्याल रखें, क्योंकि ये आपके रिश्ते पर पूर्ण विराम लगा सकने में पूरी तरह सक्षम हैं.

पार्टनर की बुराई यानी सिम्पैथी की बरसात! सॉरी आपकी कैल्क्युलेशन रॉन्ग है
जब हम रिश्ते में होते हैं तब कई बार ऐसे पल आते हैं, जब चीज़ें ठीक-ठाक नहीं चलतीं. पार्टनर की कई बातें हमें खीझ से भर देती हैं. ऐसे में पार्टनर से बात करें, बजाय इसके अगर आप चारों ओर घूमकर उसकी शिकायत करने में वक़्त ज़ाया करेंगे तो कोई भला नहीं होनेवाला. इससे आप दोनों के बीच दूरी ही आएगी. जो भी समस्या हो आपस में बातचीत करके निपटा लें. अगर आप यह सोचकर कि लोगों के सामने अपना दुखड़ा रोने से सिम्पैथी गेन करेंगे तो आप निहायत ही नादान हैं. ‘सुनि इठिलइहैं लोग सब’ यह दोहा आपने बस एग्ज़ाम में लिखने के लिए याद किया था?

प्यार खेल है, पर पुराना हिसाब बराबर करने के लिए न खेलें  
ज़िंदगी एक ऐसा स्कूल है, जिसमें हिसाब बराबर करने से जितनी दूरी बनाए रखेंगे ख़ुश रहेंगे. पर रिश्तों में देखा यह जाता है कि लोग पुरानी बातों का ग़ुस्सा मन में दबाए बरसों बैठे रहते हैं. वक़्त आने पर ग़ुबार बाहर निकालते हैं. अगर आपने भी मन में पार्टनर के प्रति शिकायतों का ढेर जमा कर रखा है तो वक़्त रहते उसे बाहर निकाल दें. नए झगड़े में पुरानी बातें, मामले की गंभीरता को बढ़ाने का काम करती हैं. बेशक प्यार खेल है. खेलें, पर पुराना हिसाब बराबर करने के लिए नहीं. नई कहानी लिखने के लिए खेलें.

जैसा फ़िल्मों में होता है… रियल लाइफ़ में नामुमक़िन है हूबहू   
जब करीना कपूर और आमिर ख़ान गाते हुए डांस करते हैं ‘जैसा फ़िल्मों में होता है, हो रहा है हूबहू’ तो सुनने और देखने में कितना अच्छा लगता है ना! यक़ीनन वह गाना और उसका फ़िल्मांकन अच्छा था. लेकिन संवैधानिक चेतावनी: फ़िल्में भले ही असल ज़िंदगी से प्रेरित होती हों, पर असल ज़िंदगी फ़िल्मी नहीं हो सकती. अगर आप चाहते हैं कि पार्टनर बिल्कुल फ़िल्मों जैसा रोमैंटिक हो तो समझिए बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी पाल ली है आपने. इस इच्छा के साथ न तो आप चैन से जी सकेंगे और ना ही पार्टनर को शांति से रहने देंगे. अनरियलिस्टिक उम्मीदें आपके रिश्ते को खटास से भर देंगी.

रिश्ते को अंधेरी गली में छोड़ना हो तो ज़रूर करें बातचीत बंद. पर क्या आप ऐसा चाहेंगे?  
किसी भी रिश्ते को बिना मौत मारना हो तो सबसे आसान तरीक़ा है बातचीत बंद कर देना. कई बार लोग झगड़े से बचने के लिए इस तरीक़े का सहारा लेते हैं, पर यह एक नए तरीक़े का झगड़ा यानी कोल्ड वॉर शुरू कर देता है. यदि आपको पार्टनर की कोई बात बुरी लग गई हो तो उसे बताएं और उसे भी अपनी बात कहने के लिए स्पेस दें. बातचीत बंद करना कोई समाधान नहीं है. अगर आप वाक़ई अपने रिश्ते को अंधेरी गली में छोड़ना चाहते हों तो पार्टनर से बेझिझक बातचीत बंद कर दें. पर क्या आप दोनों इसीलिए साथ आए थे? सोचना ज़रूर.

छुपाना भी नहीं आता, जताना भी नहीं आता… वाली फ़ीलिंग से बाहर निकलें
हर किसी की ज़िंदगी में वह दोराहा ज़रूर आता है, जब दिमाग़ में घूम रही बातें पार्टनर से कहें या न कहें इसपर श्योर नहीं होते. ऐसे में क्या करना चाहिए? हमारी सलाह है कि बात चाहे रुपए-पैसे की हो, परिवार के बारे में या पुराने रिश्ते से जुड़ी अगर वह बतानी ज़रूरी है तो ज़रूर बताएं ताकि रिश्ते की नींव मज़बूत हो सके. यदि आपने जानबूझकर उसे छुपाना चाहा तो आगे चलकर रिश्ते पर उसका उल्टा प्रभाव पड़ सकता है. तो अगर कभी आप ‘छुपाना भी नहीं आता, जताना भी नहीं आता…’ वाली फ़ीलिंग में उलझे हों तो सोच लें, छुपाने और बताने की इस दुविधा में जब पार्टनर रूठ जाएगा तो आपकी आगे की लाइनें होंगी,‘रूठ गया पार्टनर… अब मनाना भी नहीं आता…’ कहने का मतलब है लाइफ़ में सब क्लीयर रखें. ठीक है.